{"_id":"25c16e2c297234fa3bceea10af9d1c10","slug":"demand-of-people-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मांगें मानने पर ही बनने देंगे परियोजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मांगें मानने पर ही बनने देंगे परियोजना
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
Updated Mon, 21 Dec 2015 08:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नंदप्रयाग-लंगासू में प्रस्तावित जल विद्युत परियोजना को लेकर हुई पहली लोक सुनवाई में प्रभावित ग्रामीणों ने कहा यदि उनके हकहकूकों के साथ न्याय नहीं किया गया तो परियोजना का पुरजोर विरोध किया जाएगा। धार्मिक स्थलों के साथ बगैर छेड़छाड़ किए और प्रभावित गांवों के सभी लोगों को लाभ देने की बात यदि परियोजना के अधिकारी करते हैं तभी परियोजना का निर्माण करने दिया जाएगा।
विज्ञापन
यूजेवीएनएल (उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड) के निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि परियोजना में तृतीय श्रेणी के पदों पर 100 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा। इसके लिए लिखित परीक्षा में 30 प्रतिशत अंक लाने जरूरी होंगे। दो प्रतिशत सामाजिक विकास के फंड को समितियों के माध्यम से व्यय किया जाएगा। वहीं चतुर्थ श्रेणी के पदों को भी समितियों के माध्यम से भरा जाएगा।
विज्ञापन
जिलासू तहसील परिसर में उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आयोजित लोक सुनवाई में गिरसा के प्रधान अनूप सिंह, झिलोटी के दिलबर सिंह, उत्तरों के बीरेंद्र सिंह नेगी, व्यापार मंडल के अध्यक्ष कैलाश खंडूड़ी, नंदप्रयाग के बीरेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, कमल किशोर, योगेंद्र कंडारी, बल्लभ डिमरी सहित ग्राम प्रधानों और महिला मंगल दल के सदस्यों ने कई मांगें रखीं।
विज्ञापन
उन्होंने परियोजना निर्माण से पहले गांव की सड़क, पेयजल, सिंचाई अधिक व्यवस्थाएं, विवाहिताओं को भी प्रभावितों की श्रेणी में रखने, सभी को मुआवजा, अनुसूचित जाति, जनजाति और भूमिहीन परिवार को प्रभावितों में शामिल करने, मछली पकड़ने और रेत उठाने वाले खच्चर संचालकों के लिए भी विशेष सहायता, प्रभावित गांवों में बैठक कर ग्रामीणों को परियोजना के बारे में जानकारी देने की बात कही। उत्तराखंड जल विद्युत परियोजना के हरीश बहुगुणा के संचालन में लोक सुनवाई हुई।
इसमें एडीएम एसके बरनवाल, बीडीओ सुरेशी राणा, जिला पंचायत सदस्य गजपाल बर्त्वाल, नायब तहसीलदार किशन गिरी, यूजेवीएनएल के महाप्रबंधक सुरेश बलूनी, सीएस राणा, रोशन सिंह, चंद्र सिंह, विनोद कुमार, प्रतिभा बुटोला, पर्यावरण बोर्ड के डा. अजीत सिंह, योगेश शर्मा आदि मौजूद थे।
नारेबाजी कर विरोध जताया
लोक सुनवाई की सभी को जानकारी न मिलने से ग्रामीणों ने लोक सुनवाई शुरू होने से पहले नारेबाजी की। उत्तरों के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य बीरेंद्र सिंह, दिलबर बर्त्वाल आदि ने कहा कि जिन गांवों को प्रभावितों की सूची में रखा गया उन्हीं गांवों के ग्रामीणों को लोक सुनवाई की सूचना नहीं दी गई। साथ ही ग्रामीणों ने परियोजना का नाम बदले जाने की मांग भी की। बाद में यूजेवीएनएल के अधिकारियों की ओर से वार्ता करने पर ग्रामीण माने।