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जीआईसी थराली : क्षतिग्रस्त भवन का मलबा हटा, न ही सर्वे हुआ
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ढाई माह बाद भी जीआईसी थराली के क्षतिग्रस्त भवन का न तो मलबा हटाया गया और न अभी तक तकनीकी टीम ने सर्वे किया। ऐसे में स्कूल के नए भवन के निर्माण का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। मुख्य भवन क्षतिग्रस्त होने से बच्चों को अन्य कक्षाओं में पढ़ाया जा रहा है जिससे 230 छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में दिक्कतें हो रही हैं। साथ ही छात्रों के प्रयोगात्मक कार्य नहीं हो पा रहे हैं और न ही स्कूल का सामान रखने के लिए जगह मिल पा रही है।
राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज थराली के मुख्य भवन का अगला हिस्सा 12 सितंबर को अचानक भरभराकर गिर गया था जिससे भवन के बरामदे का लिंटर और छत लटक गई थी। विद्यालय प्रबंधन के अनुरोध पर शिक्षा विभाग और प्रशासन ने शीघ्र भवन का टेक्निकल सर्वे कराने के बाद इसको निष्प्रयोज्य घोषित कर इसके मलबे को हटाने की बात कही थी। सर्वे का जिम्मा लोनिवि को दिया गया था लेकिन ढाई माह बाद भी न तो लोनिवि की तकनीकी टीम ने सर्वे किया न ही यहां से मलबा हटाया गया। जबकि भूगर्भ विशेषज्ञों की टीम ने हादसे के दूसरे दिन ही इसका सर्वे कर रिपोर्ट दी थी कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी से भवन गिरा है। इसके बावजूद अभी तक लोनिवि की टेक्निकल टीम ने इसका सर्वे नहीं किया जिससे यहां नए भवन के निर्माण का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है। अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रेमबल्लभ देवराड़ी ने कहा कि भूगर्भ विशेषज्ञ की रिपोर्ट के बाद क्षतिग्रस्त भवन को तुरंत गिरा देना चाहिए। कोषाध्यक्ष विजय कुंवर, अभिभावक कैलाश रावत, रजनी देवी, पुष्पा देवी, प्रकाश चंद्र आदि ने कहा कि फिलहाल छात्रों की पुराने कमरों में पढ़ाई करवाई जा रही है। कमरे नहीं होने से छात्र प्रयोगात्मक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कार्यालय और स्कूल की अन्य सामग्री के लिए कमरे नहीं हैं। अभिभावकों ने क्षतिग्रस्त भवन को तोड़कर इसके स्थान पर नया भवन बनवाने की मांग की।
हमने भवन क्षतिग्रस्त होते ही विभाग और प्रशासन को इस भवन को गिराने करने के लिए पत्राचार कर दिया था। उसके बाद भी लगातार पत्राचार कर रहे हैं लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बच्चों को पढ़ाई करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - महिपाल फस्र्वाण, प्रभारी प्रधानाचार्य, राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज थराली।
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विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने के बाद हमने पूरी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को दे दी थी। आगे का निर्णय लेने का अधिकारी उनके पास ही है । - मास्टर आदर्श खंड शिक्षा अधिकारी थराली।
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राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज थराली के मुख्य भवन का अगला हिस्सा 12 सितंबर को अचानक भरभराकर गिर गया था जिससे भवन के बरामदे का लिंटर और छत लटक गई थी। विद्यालय प्रबंधन के अनुरोध पर शिक्षा विभाग और प्रशासन ने शीघ्र भवन का टेक्निकल सर्वे कराने के बाद इसको निष्प्रयोज्य घोषित कर इसके मलबे को हटाने की बात कही थी। सर्वे का जिम्मा लोनिवि को दिया गया था लेकिन ढाई माह बाद भी न तो लोनिवि की तकनीकी टीम ने सर्वे किया न ही यहां से मलबा हटाया गया। जबकि भूगर्भ विशेषज्ञों की टीम ने हादसे के दूसरे दिन ही इसका सर्वे कर रिपोर्ट दी थी कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी से भवन गिरा है। इसके बावजूद अभी तक लोनिवि की टेक्निकल टीम ने इसका सर्वे नहीं किया जिससे यहां नए भवन के निर्माण का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है। अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रेमबल्लभ देवराड़ी ने कहा कि भूगर्भ विशेषज्ञ की रिपोर्ट के बाद क्षतिग्रस्त भवन को तुरंत गिरा देना चाहिए। कोषाध्यक्ष विजय कुंवर, अभिभावक कैलाश रावत, रजनी देवी, पुष्पा देवी, प्रकाश चंद्र आदि ने कहा कि फिलहाल छात्रों की पुराने कमरों में पढ़ाई करवाई जा रही है। कमरे नहीं होने से छात्र प्रयोगात्मक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कार्यालय और स्कूल की अन्य सामग्री के लिए कमरे नहीं हैं। अभिभावकों ने क्षतिग्रस्त भवन को तोड़कर इसके स्थान पर नया भवन बनवाने की मांग की।
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हमने भवन क्षतिग्रस्त होते ही विभाग और प्रशासन को इस भवन को गिराने करने के लिए पत्राचार कर दिया था। उसके बाद भी लगातार पत्राचार कर रहे हैं लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बच्चों को पढ़ाई करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - महिपाल फस्र्वाण, प्रभारी प्रधानाचार्य, राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज थराली।
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विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने के बाद हमने पूरी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को दे दी थी। आगे का निर्णय लेने का अधिकारी उनके पास ही है । - मास्टर आदर्श खंड शिक्षा अधिकारी थराली।