वेद मंत्रोच्चारण के साथ शुभ मुहूर्त पर सिद्घपीठ कुरुड़ मंदिर से दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियां मंदिर परिसर में स्थापित कर दी गई हैं। मंगलवार को मां नंदा अपने भक्तों के साथ कैलाश के लिए विदा होगी। सोमवार को मां नंदा की डोलियों के गर्भगृह से बाहर आने के बाद छंतोलियों को भी कैलाश जाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
सोमवार को सुबह करीब दस बजे मां नंदा की डोलियों का श्रृंगार व संकल्प पूजा के बाद गर्भगृह से मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। मुख्य पुजारी मुंशी चंद्र, प्रकाश गौड़, योगेश्वर प्रसाद, विजय प्रसाद और मनोहर प्रसाद और मंदिर समिति के अध्यक्ष मंशाराम गौड़ ने मां नंदा की श्रृंगार पूजा व अन्य पूजाएं संपन्न की। कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष मंशाराम गौड़ ने बताया कि मंगलवार को बधाण की मां नंदा की डोली अपने भक्तों के साथ रात्रि प्रवास के लिए चरबंग पहुंचेगी। इसके बाद डोली 13 सितंबर को बेदनी बुग्याल पहुंचेगी। इसके बाद मां नंदा अपने ननिहाल थराली विकास खंड के देवराड़ा गांव में छह माह तक प्रवास करेगी, जबकि दशोली क्षेत्र की मां नंदा की डोली 13 सितंबर को बालपाटा पहुंचेगी। यहां पूजा-अर्चना के बाद डोली कुरुड़ मंदिर में स्थापित कर दी जाएगी। इस मौके पर भागवत सिंह बिष्ट, राकेश गौड़, मोहन प्रसाद, भगवान सिंह, सुजान सिंह आदि मौजूद रहे।