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कर्णप्रयाग में 22 साल बाद लौटी भाजपा
ब्यूरो/ अमर उजाला, कर्णप्रयाग
Updated Sat, 11 Mar 2017 10:17 PM IST
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विधानसभा गठन के बाद दूसरी बार जीतने का मिथक इस बार टूट गया है। वर्ष 1974 मेें बनी विधानसभा में अब तक सभी जीतने वाले नेता दो या दो से अधिक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। भाजपा ने जीत के साथ ही यहां 2012 में गंवाई सीट को अब पांच साल बाद फिर पा लिया है।
वर्ष 1974 में कर्णप्रयाग विधानसभा बनी थी, जिसमें तब डा. शिवानंद नौटियाल विधायक चुने गए। वर्ष 1991 तक लगातार डा. नौटियाल चार बार चुनाव जीते। वर्ष 1991 में आई रामलहर में भाजपा के डा. रमेश पोखरियाल निशंक कर्णप्रयाग से चुनाव जीते। डा. निशंक भी यहां से तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। राज्य बनने के बाद 2002 में हुए पहले निर्वाचन में भाजपा के अनिल नौटियाल विधायक रहे।
नौटियाल ने वर्ष 2002 में भी जीत दर्ज की। दो बार विधायक रहने के बाद वर्ष 2012 में अनिल नौटियाल का टिकट भाजपा ने काट दिया था। तब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी यहां से विधायक बने, लेकिन इस बार प्रदेश में चले मोदी मैजिक में विधानसभा में यह मिथक टूट गया। शनिवार को आए चुनाव परिणामों में भाजपा के सुरेंद्र सिंह नेगी इस मिथक को तोड़ने में कामयाब रहे।
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वर्ष 1974 में कर्णप्रयाग विधानसभा बनी थी, जिसमें तब डा. शिवानंद नौटियाल विधायक चुने गए। वर्ष 1991 तक लगातार डा. नौटियाल चार बार चुनाव जीते। वर्ष 1991 में आई रामलहर में भाजपा के डा. रमेश पोखरियाल निशंक कर्णप्रयाग से चुनाव जीते। डा. निशंक भी यहां से तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। राज्य बनने के बाद 2002 में हुए पहले निर्वाचन में भाजपा के अनिल नौटियाल विधायक रहे।
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नौटियाल ने वर्ष 2002 में भी जीत दर्ज की। दो बार विधायक रहने के बाद वर्ष 2012 में अनिल नौटियाल का टिकट भाजपा ने काट दिया था। तब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी यहां से विधायक बने, लेकिन इस बार प्रदेश में चले मोदी मैजिक में विधानसभा में यह मिथक टूट गया। शनिवार को आए चुनाव परिणामों में भाजपा के सुरेंद्र सिंह नेगी इस मिथक को तोड़ने में कामयाब रहे।
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