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Chamoli News: बदरीनाथ धाम आए यात्रियों को खूब भाए भोजपत्र के स्मृतिचिह्न
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इस बार बदरीनाथ धाम की यात्रा कई मायनों में खास रही। इसमें पौराणिक लिपि के लिए प्रसिद्ध भोजपत्र का नए स्वरूप में सामने आना और यात्रियों के आकर्षक का केंद्र बनना भी एक रहा। भोजपत्र के सोविनियर (खास रूप में बना स्मृति चिह्न, निशानी) बेचकर महिला समूहों ने दो लाख तक की आय की है।
भोजपत्र विलुप्त होती प्रजाति है जिसे उस वक्त नई ताकत मिली जब गत वर्ष माणा गांव की यात्रा पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्थानीय महिलाओं ने भोजपत्र पर लिखा संदेश भेंट किया। मोदी ने बाद में ट्वीट कर इसकी खूब सराहना की। मोदी से मिली सराहना के बाद जिला प्रशासन ने महिलाओं को ब्लॉक स्तर पर भोजपत्र के सोविनियर बनाने का प्रशिक्षण दिया जिसमें बदरीनाथ व अन्य देवताओं की आरती, गायत्री मंत्र आदि लिखने और उनको बेहतर फ्रेम के साथ सजाने का प्रशिक्षण दिया गया। भोजपत्र से निर्मित राखियां भी बनाई गई जिन्हें यात्रियों ने हाथों हाथ लिया।
जोशीमठ ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी मोहन जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री की सराहना मिलने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर महिलाओं को भोजपत्र से सोविनियन, माला आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। बदरीनाथ धाम में स्टॉल लगाकर इनकी बिक्री की गई जिससे महिला समूहों को करीब दो लाख तक की आय हुई है। ब्लॉक स्तर पर भोजपत्र के संवर्धन के लिए नर्सरी तैयार की जा रही है। जिससे इसका उत्पादन बढ़ेगा और अधिक सामग्री तैयार करने में दिक्कत नहीं आएगी।
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भोजपत्र विलुप्त होती प्रजाति है जिसे उस वक्त नई ताकत मिली जब गत वर्ष माणा गांव की यात्रा पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्थानीय महिलाओं ने भोजपत्र पर लिखा संदेश भेंट किया। मोदी ने बाद में ट्वीट कर इसकी खूब सराहना की। मोदी से मिली सराहना के बाद जिला प्रशासन ने महिलाओं को ब्लॉक स्तर पर भोजपत्र के सोविनियर बनाने का प्रशिक्षण दिया जिसमें बदरीनाथ व अन्य देवताओं की आरती, गायत्री मंत्र आदि लिखने और उनको बेहतर फ्रेम के साथ सजाने का प्रशिक्षण दिया गया। भोजपत्र से निर्मित राखियां भी बनाई गई जिन्हें यात्रियों ने हाथों हाथ लिया।
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जोशीमठ ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी मोहन जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री की सराहना मिलने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर महिलाओं को भोजपत्र से सोविनियन, माला आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। बदरीनाथ धाम में स्टॉल लगाकर इनकी बिक्री की गई जिससे महिला समूहों को करीब दो लाख तक की आय हुई है। ब्लॉक स्तर पर भोजपत्र के संवर्धन के लिए नर्सरी तैयार की जा रही है। जिससे इसका उत्पादन बढ़ेगा और अधिक सामग्री तैयार करने में दिक्कत नहीं आएगी।
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