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सात सालों से शासन मं धूल फांक रही डामरीकरण की फाइल
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पिंडर घाटी को कुमाऊं से जोड़ने वाले ग्वालदम-खंपाधार-चिड़िगा मल्ला मार्ग के डामरीकरण की फाइल सात सालों से शासन में धूल फांक रही है। ग्रामीणों ने जल्द सड़क निर्माण की मांग उठाई।
देवाल घाटी के 50 से अधिक गांवों को जोड़ने के लिए वर्ष 2013 में लगभग तीन करोड़ की लागत से ग्वालदम खंपाधार से चिड़िगा मल्ला तक 7 किमी सड़क की कटिंग की गई लेकिन उसके बाद से यह सड़क उसी हालत में है। पहले चरण की कटिंग में भी सड़क मानकों के अनुसार नहीं काटी गई इसके बाद भी ठेकेदारों का भुगतान कर दिया गया। इस सड़क पर न तो चौड़ीकरण हुआ और न ही दीवारें बनाई गईं। ज्येष्ठ प्रमुख महावीर सिंह, क्षेपंस गजेंद्र रावल, हीरा सिंह, हरीश जोशी, उर्मिला गड़िया आदि ने कहा कि वर्ष 2020 में इस सड़क के सुधारीकरण के लिए 88 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन बजट नहीं होने का बहाना बनाकर फाइल मुख्यमंत्री के कार्यालय में पड़ी है। ऐसे में ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर गंतव्य तक जाना पड़ रहा है। अधिशासी अभियंता थराली मूलचंद गुप्ता ने कहा कि शासन से धनराशि स्वीकृति की फाइल अंतिम स्वीकृति के लिए तीन माह से मुख्यमंत्री कार्यालय में है। धनराशि मिलने के बाद ही सड़क का सुधारीकरण किया जाएगा।
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देवाल घाटी के 50 से अधिक गांवों को जोड़ने के लिए वर्ष 2013 में लगभग तीन करोड़ की लागत से ग्वालदम खंपाधार से चिड़िगा मल्ला तक 7 किमी सड़क की कटिंग की गई लेकिन उसके बाद से यह सड़क उसी हालत में है। पहले चरण की कटिंग में भी सड़क मानकों के अनुसार नहीं काटी गई इसके बाद भी ठेकेदारों का भुगतान कर दिया गया। इस सड़क पर न तो चौड़ीकरण हुआ और न ही दीवारें बनाई गईं। ज्येष्ठ प्रमुख महावीर सिंह, क्षेपंस गजेंद्र रावल, हीरा सिंह, हरीश जोशी, उर्मिला गड़िया आदि ने कहा कि वर्ष 2020 में इस सड़क के सुधारीकरण के लिए 88 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन बजट नहीं होने का बहाना बनाकर फाइल मुख्यमंत्री के कार्यालय में पड़ी है। ऐसे में ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर गंतव्य तक जाना पड़ रहा है। अधिशासी अभियंता थराली मूलचंद गुप्ता ने कहा कि शासन से धनराशि स्वीकृति की फाइल अंतिम स्वीकृति के लिए तीन माह से मुख्यमंत्री कार्यालय में है। धनराशि मिलने के बाद ही सड़क का सुधारीकरण किया जाएगा।
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