{"_id":"6050dcb58ebc3ec89c780d21","slug":"as-soon-as-the-fire-season-started-gopeshwar-news-drn3738503115","type":"story","status":"publish","title_hn":"फायर सीजन शुरू होते ही एक माह में जल गया 34 हेक्टेयर जंगल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फायर सीजन शुरू होते ही एक माह में जल गया 34 हेक्टेयर जंगल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फायर सीजन शुरू होने पर एक माह में ही चमोली जिले के कई हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। चमोली जिले में 15 फरवरी से अब तक 34.50 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जबकि अभी तक चार प्रभागों के जंगलों में 32 जगहों पर आग लग चुकी है। गर्मी शुरू होने से पहले ही जंगलों में बढ़ती आग की घटना से वन विभाग की चिंता भी बढ़ गई है।
फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हो जाता है, जिसके साथ ही वन विभाग भी सतर्क हो जाता है। चमोली जिले में चार वन प्रभाग हैं और इन चारों वन प्रभागों के जंगलों में आग लग चुकी है। बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत सबसे अधिक 15 जगहों पर आग लग चुकी है, जबकि केदारनाथ वन प्रभाग में सात और अलकनंदा भूमि संरक्षण और नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क जोशीमठ में पांच-पांच जगहों पर जंगलों में आग लग चुकी है, जिसमें 34.50 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। बीते साल अक्तूबर से फायर सीजन शुरू होने से पहले तक 17 हेक्टेयर जंगल जल चुके थे। गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं में भी वृद्धि हो जाएगी, जिसको लेकर वन विभाग की चिंता भी बढ़ने लगी है।
किस वन प्रभाग में कितना जंगल जला
प्रभाग जंगल जला (हेक्टेयर में)
बदरीनाथ वन प्रभाग 12.30
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग 12.45
अलकनंदा भूमि संरक्षण 5.50
नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क 4.25
432 फायर वॉचर किए तैनात
- चारों वन प्रभागों में वन विभाग ने 432 फायर वॉचर तैनात किए हैं, जिसमें क्रू स्टेशनों पर 272 और वन पंचायतों में 160 फायर वॉचर रखे गए हैं। इसके अलावा 85 दैनिक कर्मचारी भी हैं, जबकि नियमित कर्मियों की संख्या 397 है। चारों वन प्रभागों में मास्टर कंट्रोल रूम और क्रू स्टेशनों की संख्या 100 है।
विज्ञापन
विज्ञापन
फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हो जाता है, जिसके साथ ही वन विभाग भी सतर्क हो जाता है। चमोली जिले में चार वन प्रभाग हैं और इन चारों वन प्रभागों के जंगलों में आग लग चुकी है। बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत सबसे अधिक 15 जगहों पर आग लग चुकी है, जबकि केदारनाथ वन प्रभाग में सात और अलकनंदा भूमि संरक्षण और नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क जोशीमठ में पांच-पांच जगहों पर जंगलों में आग लग चुकी है, जिसमें 34.50 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। बीते साल अक्तूबर से फायर सीजन शुरू होने से पहले तक 17 हेक्टेयर जंगल जल चुके थे। गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं में भी वृद्धि हो जाएगी, जिसको लेकर वन विभाग की चिंता भी बढ़ने लगी है।
विज्ञापन
किस वन प्रभाग में कितना जंगल जला
प्रभाग जंगल जला (हेक्टेयर में)
बदरीनाथ वन प्रभाग 12.30
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग 12.45
अलकनंदा भूमि संरक्षण 5.50
नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क 4.25
432 फायर वॉचर किए तैनात
- चारों वन प्रभागों में वन विभाग ने 432 फायर वॉचर तैनात किए हैं, जिसमें क्रू स्टेशनों पर 272 और वन पंचायतों में 160 फायर वॉचर रखे गए हैं। इसके अलावा 85 दैनिक कर्मचारी भी हैं, जबकि नियमित कर्मियों की संख्या 397 है। चारों वन प्रभागों में मास्टर कंट्रोल रूम और क्रू स्टेशनों की संख्या 100 है।
विज्ञापन