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बेटे की मौत के गम में पिता ने दी जान
Chamoli
Updated Thu, 16 Oct 2014 05:32 AM IST
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घाट/गोपेश्वर। घाट ब्लाक के बांजबगड़ गांव के विक्रम सिंह को मूल्यागांव में हुई वाहन दुर्घटना में बेटे राकेश की मौत की खबर मिली तो गम में उन्होंने भी जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। इस घटना से क्षेत्र में मातम छा गया है।
बांजबगड़ निवासी देव सिंह के पुत्र बलवीर (46) की इलाज के दौरान 13 अक्तूबर को दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। इस दौरान बलवीर के साथ उनकी पत्नी बीना और बलवीर का ममेरा भाई राकेश भी दिल्ली में ही था। मंगलवार रात को वाहन से जब मृतक बलवीर को बांजबगड़ ला रहे थे तो मूल्यागांव के पास इंडिका कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें बीना और राकेश की मौत हो गई। जब बुधवार सुबह नौ बजे राकेश के पिता विक्रम सिंह (64) ने राकेश की मौत होने की खबर सुनी तो इस गम में उन्होंने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी। राकेश की एक वर्ष पूर्व ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी नीलू का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, बलवीर और बीना की मौत के बाद उनके तीन बच्चों हिमांशु (13), अनिल और सुनील (जुड़वा 10 वर्ष) के लालन-पालन की जिम्मेदारी दादा देव सिंह और दादी रेवती देवी के कंधों पर आ गई है। इधर राकेश की मां मथुरा देवी ने भी मौत की खबर से बदहवास पड़ी हैं। बलवीर का ननिहाल भी बांजबगड़ गांव में ही था। एक साथ चार मौतें होने पर गांव में मातम छाया हुआ है।
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बांजबगड़ निवासी देव सिंह के पुत्र बलवीर (46) की इलाज के दौरान 13 अक्तूबर को दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। इस दौरान बलवीर के साथ उनकी पत्नी बीना और बलवीर का ममेरा भाई राकेश भी दिल्ली में ही था। मंगलवार रात को वाहन से जब मृतक बलवीर को बांजबगड़ ला रहे थे तो मूल्यागांव के पास इंडिका कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिसमें बीना और राकेश की मौत हो गई। जब बुधवार सुबह नौ बजे राकेश के पिता विक्रम सिंह (64) ने राकेश की मौत होने की खबर सुनी तो इस गम में उन्होंने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी। राकेश की एक वर्ष पूर्व ही शादी हुई थी। उसकी पत्नी नीलू का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, बलवीर और बीना की मौत के बाद उनके तीन बच्चों हिमांशु (13), अनिल और सुनील (जुड़वा 10 वर्ष) के लालन-पालन की जिम्मेदारी दादा देव सिंह और दादी रेवती देवी के कंधों पर आ गई है। इधर राकेश की मां मथुरा देवी ने भी मौत की खबर से बदहवास पड़ी हैं। बलवीर का ननिहाल भी बांजबगड़ गांव में ही था। एक साथ चार मौतें होने पर गांव में मातम छाया हुआ है।
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