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आयोजन और घोषणाओं तक सिमटा गैरसैंण

Chamoli Updated Mon, 17 Feb 2014 05:30 AM IST
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कर्णप्रयाग। उत्तराखंड बनने के 13 वर्षों बाद भी गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए आम राय नहीं बन पाई है। चुनावी माहौल में ही राजनीतिक दलों को यहां की याद आई है। नब्बे के दशक से लेकर वर्ष 2013 तक यहां कई आयोजन हुए, लेकिन मूलभूत सुविधाएं आज भी नदारद हैं।
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गढ़वाल-कुमाऊं के मध्य में 20,81,082 हेक्टयर में बसा गैरसैंण घोषणाओं, शिलान्यास और आश्वासनों तक ही सिमटा है। वर्ष 1989 में जिस उद्देश्य से डीडी पंत और विपिन त्रिपाठी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के रूप में शामिल किया गया था। वर्ष 1992 में गैरसैंण को उक्रांद ने चंद्रनगर नाम से राजधानी घोषित कर आगे तो बढ़ाया, लेकिन वर्ष 2007 के बाद उसका भी गैरसैंण के प्रति मोह भंग हो गया। गैरसैंण के पूर्व प्रमुख जानकी रावत और सुरेंद्र सिंह नेगी कहते हैं कि यहां की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है और सरकार आयोजनों को भी विकास बता रही है।

राज्य और गैरसैंण राजधानी के लिए आंदोलनों का सफर
- 1952 में शुरू हुई उत्तराखंड राज्य निर्माण की मांग
- 1991 यूपी शासन में भाजपा ने तीन मंत्रियों और विधायकों ने गैरसैंण में जनसभा कर मांग का समर्थन किया।
- 1994 में गैरसैंण राजधानी को लेकर लेकर 157 दिन का क्रमिक अनशन किया गया।
- 2000 में उत्तराखंड महिला मोर्चा ने गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर खबरदार रैली निकाली।
- 2002 में गैरसैंण की मांग को लेकर श्रीनगर में जनता का प्रदर्शन। गैरसैंण राजधानी आंदोलन समिति का गठन।
- 2007-2009 गैरसैंण की मांग को लेकर प्रवासियों की कई संस्थाओं ने जनसभाएं कर समर्थन जुटाए। यह प्रयास प्रतिवर्ष 2 अक्तूबर के रुप में आज भी जारी है।
- बाबा मोहन उत्तराखंडी ने भी राज्य और गैरसैंण राजधानी के लिए 13 बार आमरण अनशन किया।

गैरसैंण में बड़े आयोजन --
- वर्ष 1991 में गैरसैंण में अपर शिक्षा निदेशालय एवं डायट का उद्घाटन।
- वर्ष 2012 में गैरसैंण विकास भवन सभागार में प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक।
- वर्ष 2013 में विधानसभा भवन का जीआईसी मैदान में शिलान्यास।
- वर्ष 2013 में भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन भूमि पूजन कार्यक्रम।

गैरसैंण के हुई घोषणाएं जो पूरी नहीं हुई--
- वर्ष 1991 में यूपी शासन में उप शिक्षा निदेशालय का भूमि पूजन।
- वर्ष 1996 में उत्तराखंड सचिवालय की स्थापना।
- वर्ष 2004 में कांग्रेस शासन में सीमांत विकास प्राधिकरण मुख्यालय।
- वर्ष 2008 में भाजपा शासन में ढोल-दमाऊं प्रशिक्षण केंद्र और पशु अनुसंधान केंद्र की घोषणा।
- वर्ष 2009 में भाजपा शासन में जीआईसी गैरसैंण के लिए खेल मैदान की घोषणा।

कौशिक समिति ने गैरसैंण को बताया था उचित
कर्णप्रयाग। यूपी शासन में वर्ष 1994 में गठित रमाशंकर कौशिक समिति ने भी गैरसैंण को राजधानी के लिए सही बताया था। तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल बोरा ने भी राष्ट्रपति शासन के दौरान गैरसैंण में मिनी सचिवालय के लिए 7 लाख रुपये स्वीकृत किए थे।

गैरसैंण के विकास पर एक नजर
95 ग्राम पंचायतों वाली इस तहसील में अभी भी 30 गांव सड़क से वंचित हैं। डिग्री कालेज प्राथमिक स्कूल पर चल रहा है। 20 प्राथमिक विद्यालयों में पानी नहीं है। 20 गांव/तोक अंधेरे में जी रहे हैं। अन्य इलाकों में बिजली और संचार सेवाओं का घंटों ठप होना आम बात है। 78 ग्राम पंचायतें राजस्व पुलिस के अधीन हैं, लेकिन 13 पटवारियों के सापेक्ष सात पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।

इनका कहना है --
कैबिनेट बैठक और विधानसभा भवन शिलान्यास व भूमि पूजन ने विकास की एक रूपरेखा की तरफ इशारा किया है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह इन्हें फलीभूत कर जनता को बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया कराए। - वीपी काला राज्य आंदोलनकारी व बार संघ अध्यक्ष गैरसैंण।

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