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सुनीता की सफलता से छात्र-शिक्षक प्रफुल्लित
Chamoli
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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गैरसैंण। अंतरिक्ष परी सुनीता विलियम की इंटरनेशनल स्पेश सेंटर से सकुशल वापसी पर छात्र-छात्राएं जहां प्रसन्न हैं, वहीं विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी उन्हें अपना रोल मॉडल मानते हैं।
गांव से आने वाले अधिकांश छात्र-छात्राएं टीवी स्क्रीन पर कजाकिस्तान के अरकाल्यिक स्टेशन पर स्यूज यान से उतरते हुए उन्हें नहीं देख पाए, जिसमें सुनीता कड़ी ठंड के बाद भी मुस्कुरा रही थी। सभी विद्यार्थी सुनीता की वापसी को लेकर खासे उत्साहित थे। जीआईसी में कक्षा 12वीं के छात्र हिमांशु, कुलदीप का कहना है कि भारतीय मूल की सुनीता विलियम 127 दिन स्पेश सेंटर में रहकर अंतरिक्ष के रहस्यों का अध्ययन मानव जाति की उन्नति के लिए कर रही थी। भौतिकी प्रवक्ता डीएस बिष्ट कहते हैं कि विज्ञान में किया गया परिश्रम मानव उत्थान का विषय होता है। चिकित्सा, यांत्रिकी, संचार आदि सभी विषयों में वैज्ञानिकों के श्रम का मूल्य हमें विभिन्न साधन और संसाधनों के रुप में प्राप्त होता है। निश्चित रुप से सुनीता विलियम रोल मॉडल है।
कक्षा 10वीं के छात्र रमन बुटोला सुनीता विलियम से प्रभावित होकर स्वयं अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई करना चाहते हैं। जीजीआईसी की 12वीं की छात्रा विनीता, कक्षा सात के छात्र मयंक अंतरिक्ष में महिला यात्री के रुप में रिकार्ड बनाने वाली भारतीय मूल की वैज्ञानिक को प्रसन्नता की नजर से देखते हैं।
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गांव से आने वाले अधिकांश छात्र-छात्राएं टीवी स्क्रीन पर कजाकिस्तान के अरकाल्यिक स्टेशन पर स्यूज यान से उतरते हुए उन्हें नहीं देख पाए, जिसमें सुनीता कड़ी ठंड के बाद भी मुस्कुरा रही थी। सभी विद्यार्थी सुनीता की वापसी को लेकर खासे उत्साहित थे। जीआईसी में कक्षा 12वीं के छात्र हिमांशु, कुलदीप का कहना है कि भारतीय मूल की सुनीता विलियम 127 दिन स्पेश सेंटर में रहकर अंतरिक्ष के रहस्यों का अध्ययन मानव जाति की उन्नति के लिए कर रही थी। भौतिकी प्रवक्ता डीएस बिष्ट कहते हैं कि विज्ञान में किया गया परिश्रम मानव उत्थान का विषय होता है। चिकित्सा, यांत्रिकी, संचार आदि सभी विषयों में वैज्ञानिकों के श्रम का मूल्य हमें विभिन्न साधन और संसाधनों के रुप में प्राप्त होता है। निश्चित रुप से सुनीता विलियम रोल मॉडल है।
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कक्षा 10वीं के छात्र रमन बुटोला सुनीता विलियम से प्रभावित होकर स्वयं अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई करना चाहते हैं। जीजीआईसी की 12वीं की छात्रा विनीता, कक्षा सात के छात्र मयंक अंतरिक्ष में महिला यात्री के रुप में रिकार्ड बनाने वाली भारतीय मूल की वैज्ञानिक को प्रसन्नता की नजर से देखते हैं।
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