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भरभराकर गिरा त्रिशूला गार्डर पैदल पुल
Chamoli
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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पोखरी/गोपेश्वर। त्रिशूला में नगोल नदी पर स्थापित जिला पंचायत का गार्डर पुल रविवार शाम को भरभराकर गिर पड़ा। इस दुर्घटना में एक मवेशी की मौत हो गई और 14 घायल हो गए। पोखरी ब्लाक के दस से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों का पोखरी और गोपेश्वर मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। निगोल नदी में पानी की मात्रा कम होने की वजह से फिलहाल ग्रामीण नदी को पारकर अपने घरों तक पहुंच रहे हैं।
रविवार शाम को यह घटना तब घटी जब जंगल से सेम गांव के मवेशी घरों को लौट रहे थे। अचानक पुल दोनों साइड से छिटक कर नदी में जा गिरा। यह पुल पिछले कई सालों से एक तरफ झुक गया था, जिसे देखकर जिला पंचायत ने वर्ष 2009 में पुल के एक साइड बोर्ड लगाकर ग्रामीणों को पुल से आवाजाही न करने की सलाह दी थी। मगर इस पुल के बदले वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। इस वजह से ग्रामीण इसी पुल से आवाजाही कर रहे थे।
लापरवाही है दुर्घटना की वजह
त्रिशूला गार्डर पुल जिला पंचायत ने वर्ष 1946-47 में निर्मित किया था। यह 20 मीटर लंबा पुल था। निर्माणकाल से ही पुल की मरम्मत नहीं हुई। पुल के नीचे लगी स्टील की चादरें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। आधार के लिए लगे लोहे के रस्से भी जंक खा रहे थे। ग्राम प्रधान सेम सांकरी सूरजपाल सिंह और वीरेंद्रपाल भंडारी का कहना है कि जिला पंचायत से पुल को ठीक करने के लिए कई बार कहा गया, लेकिन इस मामले में बरती गई लापरवाही के चलते ही यह घटना घटी है। भाजपा मंडल अध्यक्ष रमेश चौधरी और सामाजिक कार्यकर्ता डा मातबर रावत ने इस लापरवाही के लिए जिला पंचायत को दोषी ठहराते हुए प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने की मांग की है।
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शुक्र है, रविवार का दिन रहा
त्रिशूला में निर्मित गार्डर पुल ग्रामीणों की आवाजाही का एकमात्र साधन था। पिछले पांच माह से गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग के अवरुद्ध पडे़ होने से ग्रामीण इसी पुल से पैदल आवाजाही कर रहे थे। यह शुक्र रहा कि रविवार की छुट्टी होने के चलते छात्रों की इससे आवाजाही नहीं हुई।
प्रभावित हुए गांव
भदूड़ा, गंजेड़, संगूड़, त्रिशुला, सेम, सांकरी, बीणा, सरणा, गुगली, तल्ला बैणा, सोणा मंगरा, नागधार, विशालखाल, चमसिल, आलीसाल।
कोट----
एहतियात के लिए पुल पर बोर्ड लगाया गया था। पुल पुराना होने के कारण जीर्णशीर्ण हो गया था। इस बार दैवी आपदा में उक्त पुल के नवनिर्माण के लिए 28 लाख रुपये का स्टीमेट तहसील प्रशासन पोखरी को सौंपा गया है। शीघ्र ही पुल निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
मातबर सिंह नेगी, प्रशासनिक अधिकारी, जिला पंचायत, चमोली।
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रविवार शाम को यह घटना तब घटी जब जंगल से सेम गांव के मवेशी घरों को लौट रहे थे। अचानक पुल दोनों साइड से छिटक कर नदी में जा गिरा। यह पुल पिछले कई सालों से एक तरफ झुक गया था, जिसे देखकर जिला पंचायत ने वर्ष 2009 में पुल के एक साइड बोर्ड लगाकर ग्रामीणों को पुल से आवाजाही न करने की सलाह दी थी। मगर इस पुल के बदले वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। इस वजह से ग्रामीण इसी पुल से आवाजाही कर रहे थे।
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लापरवाही है दुर्घटना की वजह
त्रिशूला गार्डर पुल जिला पंचायत ने वर्ष 1946-47 में निर्मित किया था। यह 20 मीटर लंबा पुल था। निर्माणकाल से ही पुल की मरम्मत नहीं हुई। पुल के नीचे लगी स्टील की चादरें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। आधार के लिए लगे लोहे के रस्से भी जंक खा रहे थे। ग्राम प्रधान सेम सांकरी सूरजपाल सिंह और वीरेंद्रपाल भंडारी का कहना है कि जिला पंचायत से पुल को ठीक करने के लिए कई बार कहा गया, लेकिन इस मामले में बरती गई लापरवाही के चलते ही यह घटना घटी है। भाजपा मंडल अध्यक्ष रमेश चौधरी और सामाजिक कार्यकर्ता डा मातबर रावत ने इस लापरवाही के लिए जिला पंचायत को दोषी ठहराते हुए प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने की मांग की है।
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शुक्र है, रविवार का दिन रहा
त्रिशूला में निर्मित गार्डर पुल ग्रामीणों की आवाजाही का एकमात्र साधन था। पिछले पांच माह से गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग के अवरुद्ध पडे़ होने से ग्रामीण इसी पुल से पैदल आवाजाही कर रहे थे। यह शुक्र रहा कि रविवार की छुट्टी होने के चलते छात्रों की इससे आवाजाही नहीं हुई।
प्रभावित हुए गांव
भदूड़ा, गंजेड़, संगूड़, त्रिशुला, सेम, सांकरी, बीणा, सरणा, गुगली, तल्ला बैणा, सोणा मंगरा, नागधार, विशालखाल, चमसिल, आलीसाल।
कोट----
एहतियात के लिए पुल पर बोर्ड लगाया गया था। पुल पुराना होने के कारण जीर्णशीर्ण हो गया था। इस बार दैवी आपदा में उक्त पुल के नवनिर्माण के लिए 28 लाख रुपये का स्टीमेट तहसील प्रशासन पोखरी को सौंपा गया है। शीघ्र ही पुल निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
मातबर सिंह नेगी, प्रशासनिक अधिकारी, जिला पंचायत, चमोली।