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नौ सालों से भूस्खलन की मार झेल रहे मठ गांव के 50 परिवार
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दशोली ब्लॉक का मठ गांव नौ सालों से भूस्खलन की मार झेल रहा है। गांव के निचले हिस्से से लगातार भूस्खलन हो रहा है। हल्की बारिश होने पर भी ग्रामीण घरों को छोड़ने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन से भूस्खलन क्षेत्र के ट्रीटमेंट की मांग की, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं।
मठ झड़ेता के ग्राम प्रधान संजय सिंह, कुलदीप सिंह, कुंवर सिंह, मुकेश पंत, प्रकाश सेमवाल और जगदीश प्रसाद ने कहा कि मठ गांव में मौजूदा समय में 50 परिवार रहते हैं। वर्ष 2011 के जुलाई माह में भारी बारिश के दौरान गांव के निचले हिस्से में भूस्खलन शुरू हुआ था। भूस्खलन का कोई ट्रीटमेंट न होने के कारण हर साल बरसात में भूस्खलन से जमीन खिसक रही है। यहां ग्रामीणों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी नष्ट हो चुकी है। चमोली एसडीएम ने दो बार गांव का निरीक्षण भी किया, लेकिन आज तक प्रभावितों का पुनर्वास नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि गांव के निचले हिस्से से टीएचडीसी के जल विद्युत परियोजना स्थल के लिए हुए सड़क निर्माण कार्य के बाद से भूस्खलन सक्रिय हुआ है। यदि समय रहते भूस्खलन क्षेत्र का ट्रीटमेंट नहीं हुआ तो, गांव कभी भी भूस्खलन की जद में आ सकता है।
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मठ झड़ेता के ग्राम प्रधान संजय सिंह, कुलदीप सिंह, कुंवर सिंह, मुकेश पंत, प्रकाश सेमवाल और जगदीश प्रसाद ने कहा कि मठ गांव में मौजूदा समय में 50 परिवार रहते हैं। वर्ष 2011 के जुलाई माह में भारी बारिश के दौरान गांव के निचले हिस्से में भूस्खलन शुरू हुआ था। भूस्खलन का कोई ट्रीटमेंट न होने के कारण हर साल बरसात में भूस्खलन से जमीन खिसक रही है। यहां ग्रामीणों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी नष्ट हो चुकी है। चमोली एसडीएम ने दो बार गांव का निरीक्षण भी किया, लेकिन आज तक प्रभावितों का पुनर्वास नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि गांव के निचले हिस्से से टीएचडीसी के जल विद्युत परियोजना स्थल के लिए हुए सड़क निर्माण कार्य के बाद से भूस्खलन सक्रिय हुआ है। यदि समय रहते भूस्खलन क्षेत्र का ट्रीटमेंट नहीं हुआ तो, गांव कभी भी भूस्खलन की जद में आ सकता है।
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