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संगम तट पर होने के बावजूद भी पानी को तरस रहे खेत
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गोपेश्वर। अलकनंदा और नंदाकिनी नदी के संगम किनारे स्थित ग्राम पंचायत मासौं के ग्रामीण अपने खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में गांव में कई खेत बंजर हो गए हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पोखरी के निगोल नदी से मासौं गांव तक के लिए सिंचाई पाइप लाइन के निर्माण की मांग उठाई।
नंदप्रयाग के समीप मासौं गांव में 95 परिवार रहते हैं। यह गांव अलकनंदा और नंदाकिनी के संगम स्थल से मात्र पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थित हैं। यहां नलकूप सिस्टम और सिंचाई विभाग की सिंचाई नहर भी है, लेकिन वर्ष 2018 में सिंचाई नहर आपदा से क्षतिग्रस्त हो गई, जिसकी आज तक मरम्मत नहीं हो पाई है। ग्राम प्रधान विजय लाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य रोशन लाल, उप प्रधान मोहन कोटिया, युमंद अध्यक्ष सोहन रावत, दिनेश नेगी, शीरा देवी, सरोजनी, वसंती, सावित्री और जशोदा देवी का कहना है कि सैकोट नाले से मासौं तक सिंचाई नहर से खेतों तक पानी पहुंचाया जाता था, लेकिन आपदा के कारण जगह-जगह नहर क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई न होने से क्षेत्र में कई खेत बंजर हो गए हैं। ग्रामीणों ने समीप ही स्थित निगोल नदी से सिंचाई पाइप लाइन के निर्माण की मांग उठाई।
कोट
मासौं नहर की मरम्मत के लिए शासन से 35 लाख रुपये का प्रस्ताव एक वर्ष पूर्व भेजा गया था, लेकिन धनराशि स्वीकृत नहीं हो पाई है। अब नाबार्ड की मदद से नहर की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। - बीएस यादव, ईई, सिंचाई विभाग, गोपेश्वर, चमोली।
नंदप्रयाग के समीप मासौं गांव में 95 परिवार रहते हैं। यह गांव अलकनंदा और नंदाकिनी के संगम स्थल से मात्र पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थित हैं। यहां नलकूप सिस्टम और सिंचाई विभाग की सिंचाई नहर भी है, लेकिन वर्ष 2018 में सिंचाई नहर आपदा से क्षतिग्रस्त हो गई, जिसकी आज तक मरम्मत नहीं हो पाई है। ग्राम प्रधान विजय लाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य रोशन लाल, उप प्रधान मोहन कोटिया, युमंद अध्यक्ष सोहन रावत, दिनेश नेगी, शीरा देवी, सरोजनी, वसंती, सावित्री और जशोदा देवी का कहना है कि सैकोट नाले से मासौं तक सिंचाई नहर से खेतों तक पानी पहुंचाया जाता था, लेकिन आपदा के कारण जगह-जगह नहर क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई न होने से क्षेत्र में कई खेत बंजर हो गए हैं। ग्रामीणों ने समीप ही स्थित निगोल नदी से सिंचाई पाइप लाइन के निर्माण की मांग उठाई।
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मासौं नहर की मरम्मत के लिए शासन से 35 लाख रुपये का प्रस्ताव एक वर्ष पूर्व भेजा गया था, लेकिन धनराशि स्वीकृत नहीं हो पाई है। अब नाबार्ड की मदद से नहर की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। - बीएस यादव, ईई, सिंचाई विभाग, गोपेश्वर, चमोली।
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