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खेतों में जैविक रसायन हारवोलिव प्लस घोल के छिड़काव का ट्रायल शुरु
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गोपेश्वर। जंगली जानवरों से खेती को हो रहे नुकसान से बचाने के लिए खेतों में जैविक रसायन हारवोलिव प्लस घोल के छिड़काव का ट्रायल शुरू हो गया है। ट्रायल पंद्रह दिनों तक चलेगा। यदि विभाग का यह अभिनव प्रयास सफल रहा तो उद्यान विभाग जिले के काश्तकारों को सब्सिडी पर घोल वितरित करेगा। यह घोल खेतों में डालने से जंगली जानवर फसलों में नहीं आएंगे।
चमोली जिले में 40 हजार काश्तकार उद्यानीकरण से जुड़े हुए हैं। राज्य के गांवों में खेतीबाड़ी को वन्य जीव अत्यधिक मात्रा में नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब उद्यान विभाग ने जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए काश्तकारों को हारवोलिव प्लस घोल वितरित करने का निर्णय लिया है। यह घोल तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने तैयार किया है। मंगलवार को जैविक रसायन हारवोलिव प्लस घोल का जिलासू, पुरसाड़ी, चौंडा (थराली), र्वीसाण और डुंगरी गांव में ट्रायल हुआ। मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने बताया कि हारवोलिव प्लस घोल खेतों में जैविक खाद का काम भी करेगा। इस घोल की बदबू से जंगली जानवर खेतों से दूर रहेंगे। उन्होंने बताया कि यदि ट्रायल सफल रहा तो इसे पहले चरण में जिले के साढ़े नौ हजार काश्तकारों को वितरित किया जाएगा।
इंसेट
ऐसे बनाया गया है हारवोलिव प्लस घोल
तमिलनाडु यूनिवर्सिटी की ओर से तैयार किया गया हारवोलिव प्लस घोल एक तरल पदार्थ है। नाबार्ड के डीडीएम अभिनव कापड़ी ने बताया कि पंचगव्य (गोमूत्र, पानी, दही, गुड़ व गोबर), सड़े हुए फलों का घोल और जड़ी-बूटियों का घोल मिलाकर हारवोलिव प्लस घोल बनाया गया है।
चमोली जिले में 40 हजार काश्तकार उद्यानीकरण से जुड़े हुए हैं। राज्य के गांवों में खेतीबाड़ी को वन्य जीव अत्यधिक मात्रा में नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब उद्यान विभाग ने जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए काश्तकारों को हारवोलिव प्लस घोल वितरित करने का निर्णय लिया है। यह घोल तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने तैयार किया है। मंगलवार को जैविक रसायन हारवोलिव प्लस घोल का जिलासू, पुरसाड़ी, चौंडा (थराली), र्वीसाण और डुंगरी गांव में ट्रायल हुआ। मुख्य विकास अधिकारी हंसादत्त पांडे ने बताया कि हारवोलिव प्लस घोल खेतों में जैविक खाद का काम भी करेगा। इस घोल की बदबू से जंगली जानवर खेतों से दूर रहेंगे। उन्होंने बताया कि यदि ट्रायल सफल रहा तो इसे पहले चरण में जिले के साढ़े नौ हजार काश्तकारों को वितरित किया जाएगा।
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ऐसे बनाया गया है हारवोलिव प्लस घोल
तमिलनाडु यूनिवर्सिटी की ओर से तैयार किया गया हारवोलिव प्लस घोल एक तरल पदार्थ है। नाबार्ड के डीडीएम अभिनव कापड़ी ने बताया कि पंचगव्य (गोमूत्र, पानी, दही, गुड़ व गोबर), सड़े हुए फलों का घोल और जड़ी-बूटियों का घोल मिलाकर हारवोलिव प्लस घोल बनाया गया है।
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