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फूलों की घाटी में खिले 40 प्रजाति के रंग-बिरंगे पुष्प
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जोशीमठ। विश्व धरोहर फूलों की घाटी में धीरे-धीरे बर्फ पिघलने के साथ ही रंग-बिरंगे फूलों का खिलना भी शुरू हो गया है। अब तक लगभग 40 प्रजाति के फूल खिल गए हैं।
फूलों की घाटी एक जून को पर्यटकों की आवाजाही के लिए खुल गई थी। इस वर्ष घाटी में भारी बर्फबारी होने से अभी भी फूलों की घाटी के ट्रैक पर जगह-जगह हिमखंड पसरे हुए हैं। बर्फबारी होने के कारण नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क को घाटी में अच्छी फ्लावरिंग की उम्मीद है। घाटी में प्राइमूला, वटर कैप जिरिनियम, एनीमूना, मेरी गोल्ड, फ्रिटिलेरिया सहित 40 प्रजाति के फूल खिल गए हैं। जुलाई से अगस्त के बीच घाटी में रंग-बिरंगे फूले रहते है। प्रकृति के इस अनमोल धरोहर में 350 से अधिक प्रजाति के फूल खिले रहते हैं। घाटी में खिलने वाले पुष्प हिमालयन ब्ल्यू पॉपी को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। प्रकृति प्रेमी भरत सिंह चौहान का कहना है कि घाटी में इस वर्ष भारी बर्फबारी हुई है। इस वजह से यहां बेहतर फ्लावरिंग की उम्मीद है। फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी वृजमोहन भारती का कहना है कि घाटी के दीदार को अभी तक 285 भारतीय और 17 विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं। इनसे पार्क प्रशासन को 50 हजार की आय हुई है। वर्ष 2018 में 13500 तीर्थयात्री घाटी के सैर-सपाटे पर पहुंचे थे। जिनसे पार्क प्रशासन को 22 लाख की आय हुई थी।
फूलों की घाटी एक जून को पर्यटकों की आवाजाही के लिए खुल गई थी। इस वर्ष घाटी में भारी बर्फबारी होने से अभी भी फूलों की घाटी के ट्रैक पर जगह-जगह हिमखंड पसरे हुए हैं। बर्फबारी होने के कारण नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क को घाटी में अच्छी फ्लावरिंग की उम्मीद है। घाटी में प्राइमूला, वटर कैप जिरिनियम, एनीमूना, मेरी गोल्ड, फ्रिटिलेरिया सहित 40 प्रजाति के फूल खिल गए हैं। जुलाई से अगस्त के बीच घाटी में रंग-बिरंगे फूले रहते है। प्रकृति के इस अनमोल धरोहर में 350 से अधिक प्रजाति के फूल खिले रहते हैं। घाटी में खिलने वाले पुष्प हिमालयन ब्ल्यू पॉपी को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। प्रकृति प्रेमी भरत सिंह चौहान का कहना है कि घाटी में इस वर्ष भारी बर्फबारी हुई है। इस वजह से यहां बेहतर फ्लावरिंग की उम्मीद है। फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी वृजमोहन भारती का कहना है कि घाटी के दीदार को अभी तक 285 भारतीय और 17 विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं। इनसे पार्क प्रशासन को 50 हजार की आय हुई है। वर्ष 2018 में 13500 तीर्थयात्री घाटी के सैर-सपाटे पर पहुंचे थे। जिनसे पार्क प्रशासन को 22 लाख की आय हुई थी।
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