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25 मेगावाट के प्रोजेक्ट को केंद्र की मंजूरी की जरूरत नहीं
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 08 Apr 2016 01:21 PM IST
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उत्तराखंड में प्रस्तावित 25 मेगावाट तक की बिजली उत्पादन क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाओं के लिए अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
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ऐसे स्माल हाइड्रो प्रोजेक्ट जो पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के है उनकी अनुमति राज्य स्तर पर ही वन विभाग देगा। इससे अधिक क्षेत्रफल वाले हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों के जलविद्युत निगम के आला अफसरों के बीच दिल्ली में हुई बैठक में इन मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बनी।
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केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधियों ने मुद्दा उठाया कि स्माल हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिलने से वक्त की बर्बादी होती है, लिहाजा 25 मेगावाट से कम क्षमता ऐसे हाइड्रो प्रोजेक्ट जो पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल में बनाए जा सकते हैं उनकी मंजूरी संबंधित राज्यों के वन विभाग और सरकारों को सौंप दी जाए।
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इतना ही नहीं बैठक में केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी का भी मुद्दा उठा। राज्यों के प्रतिनिधियों ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से प्रति मेगावाट साढे़ सात करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है, जो बिजली उत्पादन में आने वाली लागत की तुलना में बहुत कम है।
सब्सिडी को साढ़े सात से बढ़ाकर 10 करोड़ किए जाने की जरूरत है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने इस पर भी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। बैठक में कैचमेंट ट्रीटमेंट प्लांट के एवज में केंद्र सरकार द्वारा लिए जाने शुल्क को माफ किए जाने का भी मुद्दा उठाया। इस पर भी सहमति बनी कि स्माल हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए इस मद में कोई वसूली नहीं की जाएगी।
यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने बताया कि तमाम मुद्दों पर सहमति बनने के बाद अब न सिर्फ स्माल हाइड्रो प्रोजेक्ट के निर्माण में कई अड़चनें दूर होगी बल्कि हिमालयी राज्यों में हाइड्रो प्रोजेक्ट के तेजी से स्थापित होने की वजह से बिजली उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
2000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
यूजेवीएनएल प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा के मुताबिक योजना के तहत राज्य में 50 स्माल हाइड्रो प्रोजेक्ट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं से दो हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। वहीं राज्य सरकार की ओर से 50 माइक्रो पावर प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई गई है, जिससे दो हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इन परियोजनाओं में से कई का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है।