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खुद को बचाने के लिए भाजपा ने आखिरी समय पर चला दांव
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 27 Mar 2016 09:33 PM IST
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शाह
- फोटो : pti
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राज्य की हरीश सरकार को गिराने के चक्कर में खलनायक बनी भाजपा ने आखिरी समय सही पत्ते चले। उन्होंने उत्तराखंड में दिल्ली और अरुणाचल जैसी गलती नहीं की और राष्ट्रपति शासन में विधानसभा को निलंबित रखने का विकल्प चुका, ताकि कोई भी राजनीतिक दल यदि सरकार बनाना चाहे तो दावा कर लें।
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इससे भाजपा के ऊपर राज्य को समय से पहले चुनाव में झोंकने का आरोप भी नहीं लगेगा। दिल्ली में शुरुआती दौर में अरविंद केजरीवाल की सरकार जब डेढ़ महीने बाद ही बहुमत के अभाव में गिरी तो इसका आरोप सीधा भाजपा पर लगा।
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चुनाव हुए तो भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया और केजरीवाल ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता संभाली। पिछले दिनों अरुणाचल में कांग्रेस की सरकार गिराने के पीछे भी भाजपा ही थी।
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भाजपा ने प्रदेश सरकार को किया अस्थिर
हालांकि यहां पर यह बात अलग रही कि सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से सरकार बनी, लेकिन सरकार भाजपा के समर्थन से बनी। पूर्वोत्तर के राज्यों में इसका संदेश भी यही गया कि भाजपा ने प्रदेश सरकार को अस्थिर किया।
अब उत्तराखंड में भी वही घटनाक्रम हुआ। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के नौ बागियों की वजह से सरकार गिरी है। यदि इन बागियों को भाजपा का समर्थन नहीं होता तो यह सरकार के खिलाफ नहीं जाते।
पूरे देश में यही संदेश गया कि भाजपा ने हरीश सरकार को अस्थिर किया है, लेकिन बाद तक आते-आते भाजपा संभल गई और विधानसभा निलंबित करके राष्ट्रपति शासन लागू कर यह विकल्प छोड़ दिया गया कि यदि कोई सरकार बनाना चाहे तो बना ले। यह इसलिए किया, ताकि भाजपा पर समय से पहले राज्य को चुनाव में धकेलने का आरोप ना लगे।