फ्लोर टेस्ट तक 33 को साथ रखना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती
- और बड़ी हो गई कुनबा सहेजने की चुनौती
- फ्लोर टेस्ट तक कांग्रेस को एकजुट रखने होंगे सहयोगी
- सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से भाजपा को राहत
- चार दिन का ग्रेस पीरियड बदल सकता है सियासी समीकरण
- हाईकोर्ट के आदेश से कांग्रेस को मिली थी मजबूती
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पूर्व सीएम हरीश रावत अपने हर बयान में एकजुटता की बात दोहरा भी रहे हैं। 27 विधायकों के साथ 6 पीडीएफ सदस्य फिलहाल एकजुट हैं, लेकिन 29 अप्रैल को फ्लोर टेस्ट तक 33 को साथ रखने में कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है।
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट के आए अंतरिम आदेश से सूबे के सियासी समीकरण गड़बड़ा गए हैं। महज 24 घंटे बाद हरीश रावत का फिर से पूर्व सीएम बन जाना साधारण घटना नहीं है। मुश्किलें सामने हैं, इसलिए हरीश को अगली व्यवस्था तक अपना कुनबा सहेजे रखने की चुनौती से पार पाना होगा।
27 अप्रैल तक की मोहलत भाजपा को राहत दे रही है, जबकि इससे कांग्रेस की आफत बढ़ा रही है। कांग्रेस खेमे में दिनभर चले सियासी घटनाक्रम में बहुमत के लिए हरीश का कुनबा आश्वस्त दिखा, लेकिन एकाध विधायकों के व्यवहार से यह संकेत मिला है कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है।
अंतरिम आदेश ने फिर बदल दी स्थितियां
गुरुवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत अपने कुनबे को मजबूत करने के लिए हर सियासी दांव चलने की स्थिति में आ गए थे, लेकिन अब अंतरिम आदेश ने फिर स्थितियां बदल दी हैं।
कांग्रेस के लिए अब सबसे बड़ी दिक्कत फ्लोर टेस्ट से पहले अगर बहुमत मिलता है तो मंत्रिमंडल की रूपरेखा क्या रहेगी। इसके लिए अब से कुछ विधायकों ने मंत्री की कुर्सी को लेकर दबाव बनाना शुरू भी कर दिया है।
हाईकोर्ट से झटका खाई भाजपा को अंतरिम आदेश से मिली संजीवनी
एक बार मात खा चुकी कांग्रेस के लिए बहुमत का आंकड़ा सुरक्षित रखना जितना चुनौती भरा है उतना ही कठिन भाजपा के लिए सरकार को अल्पमत में करने की रणनीति को सफल बनाना है।
हाईकोर्ट से झटका खाई भाजपा को अंतरिम आदेश से संजीवनी मिली है। सत्ता पाने के लिए एक बाद हरीश रावत को अल्पमत में लाने की रणनीति की सफलता का स्वाद ले चुकी भाजपा के लिए इसे दोहराना आसान नहीं होगा।
भाजपा के लिए फ्लोर टेस्ट से बड़ा टेस्ट चुनावी मैदान में उतरने का भी है। सरकार गिराने और हार्स ट्रेडिंग जैसे आरोप उसकी मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
एक होने की जरूरत है भाजपा को
कांग्रेस को पटकनी देखने की फिराक में बैठी भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक होकर सियासी रणनीति तैयार करने की है। बीते एक माह में भाजपा एक नहीं दिखी जिसका नतीजा है कि हरीश रावत का स्टिंग पार्टी भुना नहीं पाई।
उधर कांग्रेस यह साबित करने में काफी हद तक कामयाब रही है कि भाजपा ने जनता की चुनी सरकार को गिराने की कोशिश की है। ऐसे में भाजपा की केंद्रीय लीडरशिप के सामने भी चुनौती है कि किस तरह प्रदेश के नेताओं को एक लीडरशिप के अधीन लाकर कांग्रेस के समीकरणों को तोड़ा जाए।