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आए थे दो दिन रुकने और दो हफ्ते रुक गए बापू
अमर उजाला, कौसानी
Updated Wed, 02 Oct 2013 06:57 PM IST
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अनासक्ति आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार आज भी जीवित हैं। यहां सुबह-शाम उनके पसंदीदा भजन रघुपति राघव राजाराम... और पीर पराई जाने रे...गाए जाते हैं।
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साथ ही गांधी जी की सीख को जीवन में उतारा जाता है। सभी आश्रमवासी उनके नियमों का पालन करते हुए जमीन पर बैठकर ही भोजन करते हैं।
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अनासक्ति योग नाम की पुस्तक भी लिखी
अनासक्ति आश्रम कौसानी को आजादी से पहले लाल बंगले के रूप में जाना जाता था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 1929 में जब कुमाऊं के दौरे पर आए थे तो उन्हें अल्मोड़ा से बागेश्वर जाने के दौरान इसी आश्रम में दो रात रुकना था।
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लेकिन कौसानी का शांत वातावरण उन्हें इतना भा गया कि उन्होंने दो सप्ताह से अधिक समय तक यहां प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने अनासक्ति योग नाम की पुस्तक भी लिखी।
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गांधी स्मारक निधि को हस्तांतरित कर दिया बंगला
प्रख्यात साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने बताया कि कौसानी के इस आश्रम को 1969 तक लाल बंगले के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1969 में गांधी जयंती शताब्दी पर जिला पंचायत अल्मोड़ा ने बंगले को गांधी स्मारक निधि को हस्तांतरित कर दिया।
तब से आश्रम की देखरेख गांधी स्मारक निधि से जुड़े लोग कर रहे हैं। कौसानी निवासी चंद्र सिंह धर्मसतू ने बताया कि गांधी जी के आने से कौसानी का नाम आज विश्व के मानचित्र में अंकित है। उन्होंने इसे भारत का स्विट्जरलैंड कहा था।
देश-विदेश के लोग यहां वर्ष भर आते हैं
आश्रम के प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद मिश्रा ने बताया कि गांधी विचारधारा से जुडे़ देश-विदेश के लोग यहां वर्ष भर आते हैं। आश्रम गांधी जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करता है।
यहां करीब 25 सालों से गांधी जी के पसंदीदा भजन सुबह-शाम गाए जाते हैं। साथ ही आश्रमवासी जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं।