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Bageshwar News: गेहूं जैसे आटे में मिलेंगे मडुवे के गुण और पौष्टिकता
Thu, 08 Jun 2023 12:18 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 08 Jun 2023 12:18 AM IST
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सफेद मडुवा का बीज। संवाद
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बागेश्वर। आप मडुवे की पौष्टिकता और गुणों से प्रभावित हैं लेकिन कई लोग उसके रंग को नापसंद करते हैं तो आपकी यह परेशानी जल्द दूर होने वाली है। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) अल्मोड़ा की ओर से ईजाद किया गया सफेद मडुवे का बीज आपको गेहूं जैसे आटे में मडुवे की पौष्टिकता और गुण प्रदान करेगा। जिले में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) काफलीगैर ने सफेद प्रगतिशील किसानों के माध्यम से 25 नाली जमीन पर सफेद मडुवे का ट्रायल उत्पादन शुरू कर दिया है। प्रयोग सफल रहा तो अगले साल से जिले के अधिकतर किसानों को सफेद मडुवा उत्पादन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
देश में यह साल मिलेट वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक मोटे अनाज को बढ़ावा दे रही है। पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज की बाजार में मांग बढ़ रही है। मडुवे की बिक्री बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने सहकारी समितियों के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से मडुवा खरीदा। लोगों के बीच भी मडुवे की रोटी, नमकीन, बिस्कुट का क्रेज बढ़ा है लेकिन कई लोग काले रंग के कारण मडुवे को नापसंद करते हैं। इसलिए बाजार को ध्यान में रखते हुए वीपीकेएएस ने वर्ष 2020 में वीएल मडुवा- 382 नाम से सफेद मडुवे का बीज तैयार किया। जून 2022 में केवीके काफलीगैर ने संस्थान से मिले इस बीज का सफल उत्पादन अपने खेतों में किया। इससे तैयार बीज को इस साल 25 प्रगतिशील किसानों को बांटा गया है।
इन गांवों में चल रहा ट्रायल
बागेश्वर। केवीके ने जिले के सेल्टा, कपकोट के फरसाली, दुग नाकुरी के बनलेख और काफलीगैर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में इसे उगाया जा रहा है। इसकी बुवाई पांच सौ ग्राम प्रति नाली की दर से की जानी है। भिन्न जलवायु वाले इन क्षेत्रों में से जहां बेहतर पैदावार होगी, उस क्षेत्र में सफेद मडुवे का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
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गुणों से भरपूर, खेती करना भी आसान
बागेश्वर। सफेद मडुवे में भी काले मडुवे के समान कैल्शिम, फाइबर, आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। मधुमेह के मरीजों के लिए यह गेहूं के मुकाबले काफी अच्छा और सेहतमंद भोजन है। बाजार के लिहाज से यह बेहद कारगर साबित हो सकता है। सफेद मडुवे से बनने वाले बिस्कुट, नमकीन, चिप्स आदि काले मडुवा से बनने वाले उत्पादों से अधिक आकर्षक होंगे। सफेद मडुवे के उत्पादन में सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है। कम पानी वाले क्षेत्रों में भी यह आसानी से पैदा हो जाएगा। सफेद मडुवे की बुवाई से कटाई तक का चक्र 125 दिन के भीतर पूरा हो जाता है।
जिले में फिलहाल ट्रायल के तौर पर 25 किसान सफेद मडुवे की खेती कर रहे हैं। किसानों को बीज वितरण से पूर्व केवीके ने सफल ट्रायल उत्पादन किया था। रंगरूप में आकर्षक होने के बावजूद सफेद मडुवा गुण और पोषक तत्वों में काले मडुवे के समान है। अगले साल अधिकतम किसानों को सफेद मडुवा उत्पादन के लिए तैयार करने का लक्ष्य है। - डॉ. कमल कुमार पांडेय, प्रभारी, केवीके काफलीगैर, बागेश्वर।
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देश में यह साल मिलेट वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक मोटे अनाज को बढ़ावा दे रही है। पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज की बाजार में मांग बढ़ रही है। मडुवे की बिक्री बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने सहकारी समितियों के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की दर से मडुवा खरीदा। लोगों के बीच भी मडुवे की रोटी, नमकीन, बिस्कुट का क्रेज बढ़ा है लेकिन कई लोग काले रंग के कारण मडुवे को नापसंद करते हैं। इसलिए बाजार को ध्यान में रखते हुए वीपीकेएएस ने वर्ष 2020 में वीएल मडुवा- 382 नाम से सफेद मडुवे का बीज तैयार किया। जून 2022 में केवीके काफलीगैर ने संस्थान से मिले इस बीज का सफल उत्पादन अपने खेतों में किया। इससे तैयार बीज को इस साल 25 प्रगतिशील किसानों को बांटा गया है।
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इन गांवों में चल रहा ट्रायल
बागेश्वर। केवीके ने जिले के सेल्टा, कपकोट के फरसाली, दुग नाकुरी के बनलेख और काफलीगैर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में इसे उगाया जा रहा है। इसकी बुवाई पांच सौ ग्राम प्रति नाली की दर से की जानी है। भिन्न जलवायु वाले इन क्षेत्रों में से जहां बेहतर पैदावार होगी, उस क्षेत्र में सफेद मडुवे का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
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गुणों से भरपूर, खेती करना भी आसान
बागेश्वर। सफेद मडुवे में भी काले मडुवे के समान कैल्शिम, फाइबर, आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। मधुमेह के मरीजों के लिए यह गेहूं के मुकाबले काफी अच्छा और सेहतमंद भोजन है। बाजार के लिहाज से यह बेहद कारगर साबित हो सकता है। सफेद मडुवे से बनने वाले बिस्कुट, नमकीन, चिप्स आदि काले मडुवा से बनने वाले उत्पादों से अधिक आकर्षक होंगे। सफेद मडुवे के उत्पादन में सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है। कम पानी वाले क्षेत्रों में भी यह आसानी से पैदा हो जाएगा। सफेद मडुवे की बुवाई से कटाई तक का चक्र 125 दिन के भीतर पूरा हो जाता है।
जिले में फिलहाल ट्रायल के तौर पर 25 किसान सफेद मडुवे की खेती कर रहे हैं। किसानों को बीज वितरण से पूर्व केवीके ने सफल ट्रायल उत्पादन किया था। रंगरूप में आकर्षक होने के बावजूद सफेद मडुवा गुण और पोषक तत्वों में काले मडुवे के समान है। अगले साल अधिकतम किसानों को सफेद मडुवा उत्पादन के लिए तैयार करने का लक्ष्य है। - डॉ. कमल कुमार पांडेय, प्रभारी, केवीके काफलीगैर, बागेश्वर।