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Uttarakhand: इस जिले में गेहूं की खेती पर मौसम की सबसे ज्यादा मार, 40 प्रतिशत तक गिर सकती है पैदावार

Tue, 30 Jan 2024 09:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर Updated Tue, 30 Jan 2024 09:28 PM IST
सार

उत्तराखंड में सर्दियों में बारिश का नहीं होना फसलों की पैदावार के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने असिंचित क्षेत्रों में होने वाले गेहूं की पैदावार में 40 प्रतिशत तक की कमी आने की आशंका जताई है। 

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Uttarakhand News: Weather affects wheat farming, yield may fall by 40 percent in bageshwar
बागेश्वर के बिलौना में गेहूं के पौधों में समय पूर्व आने लगी बालियां। संवाद

विस्तार

बागेश्वर में सर्दियों में बारिश का नहीं होना फसलों की पैदावार के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने असिंचित क्षेत्रों में होने वाले गेहूं की पैदावार में 40 प्रतिशत तक की कमी आने की आशंका जताई है। मसूर, सरसों और फली वाले दालों का उत्पादन भी प्रभावित होने का अंदेशा है।

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जिले में 15290 हेक्टेयर भूमि पर सालाना 28321 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है। इनमें 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र असिंचित है। इन क्षेत्रों के किसान सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर निर्भर रहते हैं। नवंबर से जनवरी तक गेहूं, मसूर, सरसों और दालों के बेहतर उत्पादन के लिए 10 मिमी बारिश की जरूरत पड़ती है। हालांकि इस बार पिछले तीन महीनों में मात्र एक बार जिले में ढाई मिमी बारिश हुई है। बारिश नहीं होने का सीधा असर खेतीबाड़ी पर दिख रहा है। कई स्थानों पर गेहूं की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। अन्य फसलों पर भी बारिश नहीं होने का असर दिखने लगा है।
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गेहूं में होने लगी फोर्स फ्लावरिंग
कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. कमल कुमार पांडेय बताते हैं कि बारिश नहीं होने से गेहूं के पौधों का संपूर्ण विकास नहीं हुआ। अविकसित पौधों में बालियां लगने लगी हैं। जिसे फोर्स फ्लावरिंग कहा जाता है। इस अवस्था में बालियां भी विकसित नहीं होंगी और गेहूं के दाने भी कम लगेंगे। जिसका उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। सरसों समेत दालों पर भी बारिश नहीं होने का ऐसा ही प्रभाव पड़ रहा है।

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