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कपकोट की लंबे समय से बंद चार नहरों में चलने लगा पानी
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कपकोट नहर में मरम्मत के बाद चला पानी। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कपकोट में लंबे समय से बंद नहरों को खोलने का काम शुरू हो गया है। सिंचाई विभाग ने 12 नहरों की मरम्मत की कवायद शुरू की है जिनमें से 40 लाख रुपये की लागत से चार नहरों को दुरुस्त कर पानी चला दिया गया है। अन्य नहरों को खोलने का काम भी तेजी से चल रहा है।
वर्ष 2018-19 की आपदा मेें कपकोट की पोलिंग, अनर्सा और कपकोट नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। कपकोट लोअर नहर 2021 से बंद थी। 3.320 किमी लंबी लोअर कपकोट नहर के बंद होने से कपकोट और भंडारीगांव के आधे किसानों को दिक्कत हो रही थी। 5.370 किमी लंबी नहर क्षतिग्रस्त होने से लीली, गैनाड़, जनकड़ी, रीठाबगड़ और पोलिंग गांव की सिंचाई प्रभावित थी। अनर्सा की 3.800 किमी लंबी नहर टूटने से गांव के किसान परेशान थे, जबकि 5.880 किमी लंबी कपकोट अपर नहर के बंद होने से भंडारीगांव और कपकोट की आधी जमीन की सिंचाई बारिश पर निर्भर हो गई थी।
नहरों के क्षतिग्रस्त होने के कारण आठ गांवों में किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा था जिस कारण उत्पादन पर असर पड़ा। लंबे समय से क्षेत्रवासी विभाग से लगातार नहरों की मरम्मत कराने की मांग कर रहे थे लेकिन विभाग बजट नहीं होने की परेशानी बता रहा था।
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सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता जेएस बिष्ट ने बताया कि नहरों की मरम्मत के लिए शासन से बजट जारी होते ही कार्य शुरू करा दिया गया था। प्राथमिकता के आधार पर चार नहरों की मरम्मत हो गई है। कपकोट लोअर नहर की मरम्मत में 11.35 लाख, पोलिंग नहर में 13.83 लाख, अनर्सा नहर में 10.21 लाख और कपकोट अपर नहर की मरम्मत करने में 4.61 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
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वर्ष 2018-19 की आपदा मेें कपकोट की पोलिंग, अनर्सा और कपकोट नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। कपकोट लोअर नहर 2021 से बंद थी। 3.320 किमी लंबी लोअर कपकोट नहर के बंद होने से कपकोट और भंडारीगांव के आधे किसानों को दिक्कत हो रही थी। 5.370 किमी लंबी नहर क्षतिग्रस्त होने से लीली, गैनाड़, जनकड़ी, रीठाबगड़ और पोलिंग गांव की सिंचाई प्रभावित थी। अनर्सा की 3.800 किमी लंबी नहर टूटने से गांव के किसान परेशान थे, जबकि 5.880 किमी लंबी कपकोट अपर नहर के बंद होने से भंडारीगांव और कपकोट की आधी जमीन की सिंचाई बारिश पर निर्भर हो गई थी।
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नहरों के क्षतिग्रस्त होने के कारण आठ गांवों में किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा था जिस कारण उत्पादन पर असर पड़ा। लंबे समय से क्षेत्रवासी विभाग से लगातार नहरों की मरम्मत कराने की मांग कर रहे थे लेकिन विभाग बजट नहीं होने की परेशानी बता रहा था।
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सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता जेएस बिष्ट ने बताया कि नहरों की मरम्मत के लिए शासन से बजट जारी होते ही कार्य शुरू करा दिया गया था। प्राथमिकता के आधार पर चार नहरों की मरम्मत हो गई है। कपकोट लोअर नहर की मरम्मत में 11.35 लाख, पोलिंग नहर में 13.83 लाख, अनर्सा नहर में 10.21 लाख और कपकोट अपर नहर की मरम्मत करने में 4.61 लाख रुपये खर्च हुए हैं।