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10 साल बाद ऐठाण नहर में चला पानी
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कपकोट के ऐठाण नहर के हेड से गुजरता पानी। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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कपकोट (बागेश्वर)। दस साल से बंद पड़ी ऐठाण नहर में पानी चलने लगा है। सिंचाई विभाग ने 40.96 लाख रुपये की लागत से नहर की मरम्मत कराई है। नहर को मजबूती देने के लिए ह्यूम पाइप और एक्वाडक्ट का सहारा लिया गया है। लंबे समय बाद नहर में पानी चलने से क्षेत्र के किसानों ने खुशी जताई है।
8.5 किमी लंबी ऐठाण नहर से भानी, बड़ेत, बमसेरा, ऐठाण, भराड़ी, पालीडुंगरा, हिचौड़ी आदि नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि की सिंचाई की जाती है। वर्ष 2012 में आपदा के दौरान नहर ध्वस्त हो गई थी। नहर में पानी की आपूर्ति ठप होने से क्षेत्र के किसान बारिश के पानी पर निर्भर थे। नहर के टूटने से कई किसानों की खेतीबाड़ी का काम प्रभावित हुआ और जमीन बंजर पड़ने लगी थी।
नहर की बीच-बीच में मरम्मत की गई लेकिन मजबूती नहीं होने के कारण नहर बारिश के दौरान फिर ध्वस्त हो जाती है। इस बार विभाग ने नहर को मजबूत करने के लिए ह्यूम पाइप बिछाए और भूस्खलन से संवेदनशील जगहों पर एक्वाडेक्ट (जलसेतु) का निर्माण कराया। नहर के हेड को भी मजबूती से बनाया गया है। नहर की मरम्मत पूरी होने के बाद शनिवार को नहर में पानी चला दिया गया है।
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नहर की मरम्मत में मजबूती का विशेष ध्यान दिया गया है। मैंने स्वयं अपनी देखरेख में कार्य करवाया है। नहर के हेड से पूर्ण डिस्चार्ज के साथ पानी चला दिया गया है। सभी सिंचित क्षेत्रों तक पानी की आपूर्ति सुचारु कराई जा रही है।- जेएस बिष्ट, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग कपकोट।
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8.5 किमी लंबी ऐठाण नहर से भानी, बड़ेत, बमसेरा, ऐठाण, भराड़ी, पालीडुंगरा, हिचौड़ी आदि नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि की सिंचाई की जाती है। वर्ष 2012 में आपदा के दौरान नहर ध्वस्त हो गई थी। नहर में पानी की आपूर्ति ठप होने से क्षेत्र के किसान बारिश के पानी पर निर्भर थे। नहर के टूटने से कई किसानों की खेतीबाड़ी का काम प्रभावित हुआ और जमीन बंजर पड़ने लगी थी।
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नहर की बीच-बीच में मरम्मत की गई लेकिन मजबूती नहीं होने के कारण नहर बारिश के दौरान फिर ध्वस्त हो जाती है। इस बार विभाग ने नहर को मजबूत करने के लिए ह्यूम पाइप बिछाए और भूस्खलन से संवेदनशील जगहों पर एक्वाडेक्ट (जलसेतु) का निर्माण कराया। नहर के हेड को भी मजबूती से बनाया गया है। नहर की मरम्मत पूरी होने के बाद शनिवार को नहर में पानी चला दिया गया है।
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नहर की मरम्मत में मजबूती का विशेष ध्यान दिया गया है। मैंने स्वयं अपनी देखरेख में कार्य करवाया है। नहर के हेड से पूर्ण डिस्चार्ज के साथ पानी चला दिया गया है। सभी सिंचित क्षेत्रों तक पानी की आपूर्ति सुचारु कराई जा रही है।- जेएस बिष्ट, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग कपकोट।