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असों गांव में एक नौले से पानी जुटा रही 1500 की आबादी
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बागेश्वर के असों गांव में नौले पर पानी भरने के लिए लगी लोगों की भीड़। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। धूराफाट क्षेत्र में पेयजल समस्या थमने का नाम नहीं ले रही है। क्षेत्र के 10 ग्राम पंचायतों में पेयजल संकट बना हुआ है। असों गांव में सबसे अधिक परेशानी हो रही है। गांव की करीब 1500 की आबादी एकमात्र पेयजल स्रोत नौले से पानी जुटा रही है। ग्रामीणों को नौले से घर तक करीब एक किमी दूर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पानी जुटाने के चलते परेशान हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने विभाग से जल्द पेयजल समस्या का निदान करने की मांग की है।
धूराफाट क्षेत्र में सरयू नदी से बने बौड़ी-धूराफाट पेयजल योजना से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। गर्मियां आते ही क्षेत्र में हर साल पेयजल संकट गहराने लगता है। इस वर्ष भी हालात बदले नहीं है। क्षेत्र के बौड़ी, रैखोली, नंदीगांव, असों, बोहाला, मल्लाकोट, एरियागाड़ आदि क्षेत्रों के लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र की सबसे अधिक आबादी वाले असों गांव में दिक्कत अधिक हो रही है। ग्रामीण गोपाल सिंह असवाल का कहना है कि प्राकृतिक स्रोत से गांव के कुछ परिवारों की दूरी आधे से एक किमी तक है। लोगों को पानी सर पर ढोकर चढ़ाई पार करनी पड़ती है। हर साल गर्मी आते ही गांव में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। कई बार क्षेत्रवासियों ने विभाग को सूचित किया लेकिन हालात नहीं बदले हैं। पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों में विभाग के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है।
खनन और उपेक्षा से घट रहा नदी का जलस्तर : रावत
बागेश्वर। असों क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह रावत का कहना है कि सरयू नदी की उपेक्षा और खनन से जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। गर्मियों के दिनों में पंप तक पानी की आपूर्ति नहीं होने से पंपिंग योजना लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। हर साल हालात अधिक खराब होते जा रहे हैं। प्रशासन भी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। अगर यही हाल रहा तो जल्द ही पंपिंग योजना के अस्तित्व पर ही संकट पैदा हो जाएगा। संवाद
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कोट
बौड़ी-धूराफाट पेयजल योजना में जलस्तर कम होने से परेशानी हो रही है। क्षेत्र के सभी गांवों को बारी-बारी से पानी देने का प्रयास किया जा रहा है। नदी में पंप तक पानी की आपूर्ति करने के लिए पानी का बहाव मोड़ने के लिए भी कार्य शुरू किया जा रहा है। जल्द ही क्षेत्र की पेयजल समस्या का निदान करा लिया जाएगा।
सीएस देवड़ी, ईई जल संस्थान बागेश्वर
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धूराफाट क्षेत्र में सरयू नदी से बने बौड़ी-धूराफाट पेयजल योजना से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। गर्मियां आते ही क्षेत्र में हर साल पेयजल संकट गहराने लगता है। इस वर्ष भी हालात बदले नहीं है। क्षेत्र के बौड़ी, रैखोली, नंदीगांव, असों, बोहाला, मल्लाकोट, एरियागाड़ आदि क्षेत्रों के लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र की सबसे अधिक आबादी वाले असों गांव में दिक्कत अधिक हो रही है। ग्रामीण गोपाल सिंह असवाल का कहना है कि प्राकृतिक स्रोत से गांव के कुछ परिवारों की दूरी आधे से एक किमी तक है। लोगों को पानी सर पर ढोकर चढ़ाई पार करनी पड़ती है। हर साल गर्मी आते ही गांव में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। कई बार क्षेत्रवासियों ने विभाग को सूचित किया लेकिन हालात नहीं बदले हैं। पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों में विभाग के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है।
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खनन और उपेक्षा से घट रहा नदी का जलस्तर : रावत
बागेश्वर। असों क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह रावत का कहना है कि सरयू नदी की उपेक्षा और खनन से जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। गर्मियों के दिनों में पंप तक पानी की आपूर्ति नहीं होने से पंपिंग योजना लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। हर साल हालात अधिक खराब होते जा रहे हैं। प्रशासन भी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। अगर यही हाल रहा तो जल्द ही पंपिंग योजना के अस्तित्व पर ही संकट पैदा हो जाएगा। संवाद
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कोट
बौड़ी-धूराफाट पेयजल योजना में जलस्तर कम होने से परेशानी हो रही है। क्षेत्र के सभी गांवों को बारी-बारी से पानी देने का प्रयास किया जा रहा है। नदी में पंप तक पानी की आपूर्ति करने के लिए पानी का बहाव मोड़ने के लिए भी कार्य शुरू किया जा रहा है। जल्द ही क्षेत्र की पेयजल समस्या का निदान करा लिया जाएगा।
सीएस देवड़ी, ईई जल संस्थान बागेश्वर