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बागेश्वर के सिमस्यारी, मजखेत और पोथिंग के तालाबों के बहुरेंगे दिन
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बागेश्वर। जिले में विलुप्त हो रहे परंपरागत तालाबों को सजाने और संवारने कवायद शुरू हो गई है। विकास विभाग ने फिलहाल जिले के तीनों विकासखंडों में एक-एक तालाब का चयन किया गया है। इन तालाबों को जल संरक्षण के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
विकास विभाग ने बागेश्वर के किमोली, गरुड़ के मजखेत और कपकोट के पोथिंग में स्थित प्राचीन तालाबों का चयन किया है। तालाब के चारों ओर चौड़ी पत्ती के पौधों का प्लांटेशन की योजना है। तालाबों के आसपास बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होगी और बच्चों के लिए पार्क भी बनाए जाएंगे। यहां आकर लोग घूम सकेंगे।
इससे जहां क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा वहीं खेतों की सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध होगा। दरअसल गांव से दूर जंगलों में जल स्रोतों के आसपास बने इन तालाबों का उपयोग पहले जानवरों को पानी पिलाने और सिंचाई के लिए किया जाता था। तीनों तालाब अतिक्रमण से अछूते हैं और इनकी स्थिति अब भी ठीक है। हालांकि पानी अवश्य कम है।
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डीडीओ केएन तिवारी ने तीनों विकासखंडों के बीडीओ से इन तालाबों को विकसित करने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। मनरेगा के माध्यम से तालाबों का विकास किया जाएगा। तालाबों के सुंदरीकरण का कार्य इस वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा।
विकास विभाग ने चिह्नित किए 47 नम भूमि स्थल
बागेश्वर। विकास विभाग ने जल संरक्षण के लिए जिले में 47 नम भूमि स्थल चिह्नित किए हैं। सामान्य भाषा में नम भूमि को ताल, झील, पोखर, जलाशय, दलदल इत्यादि के नाम से जाना जाता है। इनमें वर्षा का जल संरक्षित रहता है। नम भूमि पर मनरेगा के तहत 51 लाख रुपये की लागत से जल संरक्षण के कार्य होंगे।
एक नई पहल के तहत विलुप्त हो रहे परंपरागत तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। पहले चरण में तीनों विकासखंडों में एक-एक तालाब चिह्नित किए गए हैं।
मनरेगा मद से जल संरक्षण और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए इनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा। जल संरक्षण के लिए 47 नम भूमि भी चिह्नित किए गए हैं।
- केएन तिवारी, डीडीओ, बागेश्वर।
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विकास विभाग ने बागेश्वर के किमोली, गरुड़ के मजखेत और कपकोट के पोथिंग में स्थित प्राचीन तालाबों का चयन किया है। तालाब के चारों ओर चौड़ी पत्ती के पौधों का प्लांटेशन की योजना है। तालाबों के आसपास बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होगी और बच्चों के लिए पार्क भी बनाए जाएंगे। यहां आकर लोग घूम सकेंगे।
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इससे जहां क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा वहीं खेतों की सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध होगा। दरअसल गांव से दूर जंगलों में जल स्रोतों के आसपास बने इन तालाबों का उपयोग पहले जानवरों को पानी पिलाने और सिंचाई के लिए किया जाता था। तीनों तालाब अतिक्रमण से अछूते हैं और इनकी स्थिति अब भी ठीक है। हालांकि पानी अवश्य कम है।
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डीडीओ केएन तिवारी ने तीनों विकासखंडों के बीडीओ से इन तालाबों को विकसित करने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। मनरेगा के माध्यम से तालाबों का विकास किया जाएगा। तालाबों के सुंदरीकरण का कार्य इस वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा।
विकास विभाग ने चिह्नित किए 47 नम भूमि स्थल
बागेश्वर। विकास विभाग ने जल संरक्षण के लिए जिले में 47 नम भूमि स्थल चिह्नित किए हैं। सामान्य भाषा में नम भूमि को ताल, झील, पोखर, जलाशय, दलदल इत्यादि के नाम से जाना जाता है। इनमें वर्षा का जल संरक्षित रहता है। नम भूमि पर मनरेगा के तहत 51 लाख रुपये की लागत से जल संरक्षण के कार्य होंगे।
एक नई पहल के तहत विलुप्त हो रहे परंपरागत तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। पहले चरण में तीनों विकासखंडों में एक-एक तालाब चिह्नित किए गए हैं।
मनरेगा मद से जल संरक्षण और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए इनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा। जल संरक्षण के लिए 47 नम भूमि भी चिह्नित किए गए हैं।
- केएन तिवारी, डीडीओ, बागेश्वर।