बागेश्वर। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) काफलीगैर में सात दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान 50 मौनपालकों को वैैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन के गुर सिखाए गए। सभी प्रशिक्षितों को केंद्र की ओर से एक मौन पालक बॉक्स और अन्य उपकरण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण के पहले चरण में मौनपालकों को मधुमक्खी पालन की प्रारंभिक जानकारी दी गई। मौनपालन का महत्व बताया गया। परागण में मौनवंशों की भूमिका, मधुमक्खियों को होने वाली बीमारी और प्रबंधन, मौनबॉक्सों के रखरखाव, शहद निकालने के तरीके बताए गए। सफल मौनपालक भूपाल सिंह ने प्रशिक्षुओं को अपने अनुभव भी बताए। दूसरे चरण में मौनपालकों को हवालबाग के मधुमक्खी पालन यूनिट का भ्रमण कराया गया। जहां किसानों ने मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी ली। प्रशिक्षुओं ने पंतनगर विश्वविद्यालय के मधुमक्खी पालन केंद्र और ज्योलीकोट के राजकीय मौनपालन प्रशिक्षण केंद्र का भ्रमण किया। केवीके प्रभारी डॉ. कमल कुमार पांडेय ने मौनपालकों से प्रशिक्षण का लाभ उठा कर वैज्ञानिक विधि से मौनपालन कर स्वरोजगार करने के लिए कहा। इस मौके पर वस्तु विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी, प्रक्षेत्र प्रबंधक मेदिनी प्रताप सिंह, कार्यक्रम सहायक निधि सिंह भी मौजूद रहे।