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तीन साल से एकल शिक्षक के सहारे चल रहा राप्रावि खबडोली
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय खबडोली। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। दुर्गम क्षेत्र में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय खबडोली में तीन साल से एक शिक्षक के छात्र-छात्राओं की शिक्षा चल रही है। बच्चों को पढ़ाने के अलावा शिक्षक को कार्यालयी कामकाज, मध्याह्न भोजन और प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ती है। हालांकि विद्यालय में एक शिक्षिका भी तैनात हैं, लेकिन वह व्यवस्था के तहत दूसरे विद्यालय में संबद्ध हैं। क्षेत्रवासियों ने शिक्षा विभाग से जल्द शिक्षक के रिक्त चल रहे पद पर दूसरे शिक्षक को तैनात करने की मांग की है।
ग्रामीण अंचल के राप्रावि खबडोली में खबडोली, गनगाड़ और रतगांव से बच्चे पढ़ने आते हैं। पूर्व में गनगाड़ में भी प्राथमिक स्कूल था, जिसे छात्र संख्या कम होने के कारण करीब छह साल पहले बंद कर दिया गया। उस गांव के बच्चे भी अब इसी विद्यालय में पढ़ने आते हैं। करीब दो किमी दूर से आने वाले बच्चों को शिक्षकों की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एकल शिक्षक को बच्चों को पढ़ाने के अलावा कार्यालयी कामकाज सहित अन्य व्यवस्थाएं भी देखनी पड़ती हैं, ऐसे में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है।
विद्यालय के शिक्षक कैलाश चंद्र कांडपाल ने बताया कि अक्तूबर 2019 में विद्यालय में तैनात शिक्षिका को अन्यत्र स्कूल में भेज दिया गया था, जिसके बाद वह अकेले ही स्कूल चला रहे हैं। एकल शिक्षक होने के कारण उन्हें अवकाश भी नहीं मिल पाते हैं। कई बार कार्यालयी कार्य के कारण शिक्षा भी प्रभावित हो जाती है। हालांकि अपने स्तर से वह बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने देने का पूरा प्रयास करते हैं। अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर भी बच्चों को पढ़ाया जाता है।
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राप्रावि खबडोली में एकल शिक्षक का मामला संज्ञान में आया है। जल्द मामले की जानकारी लेकर विद्यालय में रिक्त पद पर शिक्षक की तैनाती का प्रयास किया जाएगा।
राजवीर सिंह, डीईओ बेसिक, बागेश्वर
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ग्रामीण अंचल के राप्रावि खबडोली में खबडोली, गनगाड़ और रतगांव से बच्चे पढ़ने आते हैं। पूर्व में गनगाड़ में भी प्राथमिक स्कूल था, जिसे छात्र संख्या कम होने के कारण करीब छह साल पहले बंद कर दिया गया। उस गांव के बच्चे भी अब इसी विद्यालय में पढ़ने आते हैं। करीब दो किमी दूर से आने वाले बच्चों को शिक्षकों की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एकल शिक्षक को बच्चों को पढ़ाने के अलावा कार्यालयी कामकाज सहित अन्य व्यवस्थाएं भी देखनी पड़ती हैं, ऐसे में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है।
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विद्यालय के शिक्षक कैलाश चंद्र कांडपाल ने बताया कि अक्तूबर 2019 में विद्यालय में तैनात शिक्षिका को अन्यत्र स्कूल में भेज दिया गया था, जिसके बाद वह अकेले ही स्कूल चला रहे हैं। एकल शिक्षक होने के कारण उन्हें अवकाश भी नहीं मिल पाते हैं। कई बार कार्यालयी कार्य के कारण शिक्षा भी प्रभावित हो जाती है। हालांकि अपने स्तर से वह बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने देने का पूरा प्रयास करते हैं। अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर भी बच्चों को पढ़ाया जाता है।
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राप्रावि खबडोली में एकल शिक्षक का मामला संज्ञान में आया है। जल्द मामले की जानकारी लेकर विद्यालय में रिक्त पद पर शिक्षक की तैनाती का प्रयास किया जाएगा।
राजवीर सिंह, डीईओ बेसिक, बागेश्वर