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गांव को न सड़क मिली, न पर्याप्त पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर
Updated Sat, 27 Jun 2015 11:30 PM IST
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पंचायतों के कार्यकाल को एक साल हो गया है, लेकिन गांवों की छोटी-छोटी समस्याएं जस की तस हैं। ग्राम पंचायत मंडलसेरा को राज्य और 13वें वित्त आयोग से बजट मिला, लेकिन अन्य विभागों ने आंखें मूंद रखी हैं।
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नलों में पानी नहीं आने से ग्रामीण परेशान हैं। नहर में पूर्ण रूप से पानी नहीं चलने के कारण खेतों की प्यास नहीं बुझ पा रही है। गांव के लिए सड़क तो बनी है, लेकिन इसका न तो डामरीकरण हो सका है और न ही नाली बनाई गई है। आंगनबाड़ी केंद्र भवन कब बनेंगे यह यहां किसी को भी मालूम नहीं है।
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वर्ष-2011 की जनगणना के अनुसार जिला मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत मंडलसेरा की जनसंख्या चार हजार के करीब है। दर्जनभर तोकों में बंटी इस गांव के पीने के पानी का गंभीर संकट है। सिंचाई नहर में भी आंशिक रूप से पानी चल रहा है। दो साल पहले भू-स्खलन की भेंट चढ़े मंडलसेरा बाईपास का डामरीकरण नहीं हो सका है।
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गांव में तीन आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन इनके भवन नहीं बनाए गए। गांव में एएनएम की तैनाती तो है, लेकिन सेंटर भवन नहीं बना। गांव के कई परिवारों के पास सिर छिपाने के लिए छत भी नही हैं।
पानी की निकास के लिए नालियां नहीं बनने के कारण बारिश का पानी ग्रामीणों के घरों और खेतों में भर जाता है। गांव का अपेक्षित विकास नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्राम प्रधान कैलाश गोस्वामी ने बताया मनेरगा से 30 लाख रुपये, राज्य वित्त से छह लाख रुपये और 13वें वित्त आयोग से अभी तक चार लाख रुपये मिल चुके हैं।
इस धन से सीसी मार्ग, पानी की टंकी, गूल निर्माण और पाइप लाइन बिछाने, दैवी आपदा मद से विवेकानंद इंटर कालेज मंडलसेरा के पास पानी के निकास के लिए नाली निर्माण करने के काम किए गए हैं।
69 लोगों को पारिवारिक लाभ का पेंशन, बाढ़ सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरयू के किनारे दूनासागर में दीवारों के निर्माण के अलावा ट्यूबवेल लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गांव की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए बीडीसी की बैठकों में प्रस्ताव रखे हैं जबकि संबंधित विभागों को पत्र भेजे गए हैं।