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पुल ध्वस्त होने से बिछड़े दो जिले तीन साल बाद भी नहीं मिले

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jul 2021 12:16 AM IST
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The two districts separated by the collapse of the bridge were not found even after three years
बागेश्वर के कालापैरकापड़ी के भकुना तोक से नाचनी बाजार को ट्रॉली पर जाती महिलाएं। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
पुल ध्वस्त होने से बिछड़े दो जिले तीन साल बाद नहीं मिले
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कालापैरकापड़ी के भकुना तोक को पिथौरागढ़ के नाचनी से जोड़ने वाला पुल 2018 में हुआ था ध्वस्त
अमर उजाला अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। विकास के दावों के बीच पुराने पैदल पुलों की लगातार अनदेखी हो रही है। हालात यह हैं कि दो जिलों को जोड़ने वाला पैदल पुल तीन वर्ष से ध्वस्त पड़ा है। ग्रामीण रोजाना ट्राली पर खतरा उठाकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। पुल का नवनिर्माण नहीं होने से क्षेत्रवासियों में रोष बढ़ रहा है।
शामा उपतहसील के कालापैरकापड़ी गांव की मुख्य बाजार पिथौरागढ़ के नाचनी में पड़ती है। रोजाना सैकड़ों ग्रामीण जरूरी सामान की खरीदारी, बैंक और डाकखाने के कामकाज निपटाने के लिए नाचनी जाते हैं। कालापैरकाड़ी को नाचनी बाजार से जोड़ने के लिए भकुना तोक से रामगंगा नदी पर पैदल पुल बना था। वर्ष 2018 की जुलाई में भारी बारिश के कारण रामगंगा नदी के कटाव की जद में आने से पुल ध्वस्त हो गया।
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पुल टूटने के बाद पिथौरागढ़ के लोनिवि ने नाचनी से भकुना तक रामगंगा पर एक ट्राली लगाई, जिसकी मदद से ग्रामीण नदी पार करते हैं। रामगंगा पर बने पैदल पुल से कालापैरकापड़ी ग्राम पंचायत सहित आसपास के गांवों की एक हजार से अधिक की आबादी आवागमन करती थी। पुल के ध्वस्त होने के बाद ग्रामीण ट्राली के सहारे ही भारी सामान भी ला रहे हैं। इस कारण ट्राली की रस्सियां कमजोर हो रही हैं। ट्राली से आवाजाही जोखिम भरी हो रही है। कई ग्रामीण पांच किमी का चक्कर लगाकर मोटर पुल का उपयोग करने के लिए मजबूर हैं।
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करीब 50 वर्ष पहले बने पैदल पुल को ध्वस्त हुए तीन वर्ष हो गए हैं। लोग जान खतरे में डालकर रोजमर्रा का सामान खरीदने को बाजार जाते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि, प्रशासन और शासन तक ग्रामीणों का दर्द नहीं पहुंच रहा है। ट्राली पर नदी पार करते हुए दो हादसे हो चुके हैं, लेकिन पुल के निर्माण की सुध नहीं ली जा रही है। - बॉबी कार्की, ग्रामीण युवा
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कालापैरकापड़ी, भकुना वालों का रोजमर्रा का जीवन नाचनी बाजार पर निर्भर है। गांव के कई लोग बाजार में दुकान करते हैं। रोजाना ट्राली से डेढ़ से दो सौ लोग नदी पार करते हैं। हर समय खतरा बना रहता है। प्रशासन को जल्द पुल का निर्माण कराने की पहल करनी चाहिए। दूरस्थ गांवों की उपेक्षा कब तक की जाएगी। - दीवान सिंह कार्की, ग्रामीण

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कोट भकुना को नाचनी से जोड़ने वाले पुल के लिए धनराशि स्वीकृत हुई थी, जो कोरोना नियंत्रण में खर्च हो गई थी। नाबार्ड के माध्यम से पुल का निर्माण कराने की योजना है। विश्व बैंक ने पुल की डीपीआर लोनिवि को सौंप दी है। - बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट
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