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घटना की याद आते ही डबडबाने लगी परिजनों की आंखें
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sat, 18 Aug 2018 11:43 PM IST
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कपकोट के सुमगढ़ हादसे के गमगीन पीड़ित परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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कपकोट (बागेश्वर)। शक्ति स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान सुमगढ़ हादसे का जिक्र करते ही दिवंगत बच्चों के परिजनों की आंखें डबडबा गई। बातचीत में उन्होंने कहा कि इस हादसे ने उन्हें कभी दूर न होने वाला दर्द दिया है। उन्होंने हादसा हुए लंबा समय बीतने बाद भी शक्तिस्थल के ऊपर छत न डाले जाने पर हैरानी जताई।
सुमगढ़ गांव निवासी नंद किशोर मिश्रा बताते हैं हादसे में उनके कक्षा चार, दो और क में पढ़ने वाली उर्मिला, योगिता और गौरव की मौत हो गई थी। बच्चों की आत्मा की शांति के लिए कुछ समय पर पहले शक्तिस्थल पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। शासन-प्रशासन ने आज तक शक्तिस्थल पर छत तक नहीं डाली है। राम सिंह कहते हैं इस हादसे में कक्षा तीन में पढ़ने वाले उनके बेटे तारा की मौत हुई थी। शक्तिस्थल के प्रवेश द्वार पर चैनल नहीं होने से लावारिस जानवरों का अड्डा बना रहता है।
मोहन सिंह कहते हैं कि सुमगढ़ हादसे में उन्होंने अपनी बेटी प्रीति को खोया था। वह तब कक्षा दो में पढ़ती थी। शक्तिस्थल में कुछ सौंदर्यीकरण के काम हुए हैं। लेकिन स्वच्छता के कोई इंतजाम नहीं हैं। श्याम सिंह का कहना है कि इस हादसे में उनका कक्षा दो में पढ़ने वाला रमेश भी काल का ग्रास बन गया था। घटना के बाद यहां पुस्तकालय की स्थापना की बात की गई थी। जो आज तक पूरा नहीं हो सकी है। हरीश जोशी ने बताया कि हादसे की चपेट में उनकी कक्षा दो में पढ़ने वाली बेटी भारती आ गई थी। वह चाहते हैं कि प्रशासन की ओर से बच्चों की हर साल सामान्य ज्ञान और खेलकूूद प्रतियोगिता का आयोजन हो। लेकिन इस पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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पुष्कर सिंह कहते है कि इस हादसे में उनकी पुत्री की कक्षा चार में पढ़ने वाली बेटी नेहा को खो दिया था। वह चाहते हैं कि शक्तिस्थल मैदान में कोटा स्टोन लगाए जाए लेेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। परिजन खीम सिंह, धनुली देवी और कुंदन सिंह का कहना है कि शक्तिस्थल पर पीने के पानी, पुराने भवन की हालत ठीक करने, बैठने की सुविधा के लिए चटाई और फर्नीचर की व्यवस्था की जानी चाहिए।
शक्तिस्थल की छत का निर्माण और गांव को सड़क से जोड़ा जाएगा: भौर्याल
कपकोट (बागेश्वर)। विधायक बलवंत भौर्याल ने कहा कि वह अपनी निधि से शक्तिस्थल की छत का निर्माण कराएंगे। सुमगढ़ गांव के लिए छह किमी लंबी सड़क और एक मोटर पुल का निर्माण कराया जाएगा। गांव की अन्य समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के अनुुसार किया जाएगा।
सुमगढ़ गांव निवासी नंद किशोर मिश्रा बताते हैं हादसे में उनके कक्षा चार, दो और क में पढ़ने वाली उर्मिला, योगिता और गौरव की मौत हो गई थी। बच्चों की आत्मा की शांति के लिए कुछ समय पर पहले शक्तिस्थल पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। शासन-प्रशासन ने आज तक शक्तिस्थल पर छत तक नहीं डाली है। राम सिंह कहते हैं इस हादसे में कक्षा तीन में पढ़ने वाले उनके बेटे तारा की मौत हुई थी। शक्तिस्थल के प्रवेश द्वार पर चैनल नहीं होने से लावारिस जानवरों का अड्डा बना रहता है।
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मोहन सिंह कहते हैं कि सुमगढ़ हादसे में उन्होंने अपनी बेटी प्रीति को खोया था। वह तब कक्षा दो में पढ़ती थी। शक्तिस्थल में कुछ सौंदर्यीकरण के काम हुए हैं। लेकिन स्वच्छता के कोई इंतजाम नहीं हैं। श्याम सिंह का कहना है कि इस हादसे में उनका कक्षा दो में पढ़ने वाला रमेश भी काल का ग्रास बन गया था। घटना के बाद यहां पुस्तकालय की स्थापना की बात की गई थी। जो आज तक पूरा नहीं हो सकी है। हरीश जोशी ने बताया कि हादसे की चपेट में उनकी कक्षा दो में पढ़ने वाली बेटी भारती आ गई थी। वह चाहते हैं कि प्रशासन की ओर से बच्चों की हर साल सामान्य ज्ञान और खेलकूूद प्रतियोगिता का आयोजन हो। लेकिन इस पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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पुष्कर सिंह कहते है कि इस हादसे में उनकी पुत्री की कक्षा चार में पढ़ने वाली बेटी नेहा को खो दिया था। वह चाहते हैं कि शक्तिस्थल मैदान में कोटा स्टोन लगाए जाए लेेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। परिजन खीम सिंह, धनुली देवी और कुंदन सिंह का कहना है कि शक्तिस्थल पर पीने के पानी, पुराने भवन की हालत ठीक करने, बैठने की सुविधा के लिए चटाई और फर्नीचर की व्यवस्था की जानी चाहिए।
शक्तिस्थल की छत का निर्माण और गांव को सड़क से जोड़ा जाएगा: भौर्याल
कपकोट (बागेश्वर)। विधायक बलवंत भौर्याल ने कहा कि वह अपनी निधि से शक्तिस्थल की छत का निर्माण कराएंगे। सुमगढ़ गांव के लिए छह किमी लंबी सड़क और एक मोटर पुल का निर्माण कराया जाएगा। गांव की अन्य समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के अनुुसार किया जाएगा।