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भयूं-गडेरा सड़क के शिलापट मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग मुखर
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रमेश सिंह गढ़िया।
- फोटो : BAGESHWAR
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कपकोट/बागेश्वर। कपकोट के भयूं-गडेरा सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लोकार्पण शिलापट को लगाने के बाद उखाड़े जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। लोगों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। अमर उजाला के सोमवार के अंक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया था।
लोनिवि ने कुछ दिन पहले भयूं-गडेरा सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लोकार्पण से संबंधित शिलापट लगाया था। शिलापट में सड़क का नाम भयूं-गडेरा अंकित था। लागत 1.67 करोड़ लिखी गई थी। इस पर हो हल्ला मचा तो लोनिवि ने शिलापट उखाड़ दिया। विभाग का तर्क है कि शिलापट गलती से लग गया था। गडेरा के लोगों का कहना है कि दो वर्ष पहले जब सड़क का लोकार्पण हुआ तो उसी समय उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठा दी थी लेकिन संबंधित विभाग ने ध्यान नहीं दिया। गांव के लोगों ने सड़क सुधारीकरण के नाम पर धन खपाने की आशंका जताई है। लोगों ने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शिलापट गलत बना था तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। दो वर्ष बाद शिलापट सड़क पर क्यों लगाया और लोगों के विरोध के बाद क्यों हटाया, यह भी जांच में शामिल होना चाहिए।
लोकार्पण के समय ही किया था विरोध
सात मार्च 2019 को लोनिवि ने जब भयूं-गडेरा सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के कार्य का लोकार्पण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कराया था उसी समय गांव के लोगों ने इसका विरोध जनप्रतिनिधियों और लोनिवि के अधिकारियों के सामने किया था। -रमेश सिंह गढ़िया सामाजिक कार्यकर्ता गुलेर।
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कई सवाल खडे़ कर रही है यह घटना
लोकार्पण के दो वर्ष बाद शिलापट लगाना और जनता के विरोध के बाद उसे हटाना, कई सवाल खड़े कर रही है। गडेरा सड़क के नाम पर घपलेबाजी की बू आ रही है। शिलापट में गुलेर सड़क क्यों लिखा गया। इसकी जांच अवश्य होनी चाहिए। -विनोद सिंह गढ़िया निवासी गडेरा गांव।
कैसे लोकार्पण कर दिया, जांच का विषय
भयूं-गडेरा सड़क की दशा बेहद खराब है। सड़क पर किमी सात के बाद 10 किमी हिस्से में सुधारीकरण और डामरीकरण नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने कैसे लोकार्पण कर दिया, यह जांच का विषय है। - सुरेश सिंह गढ़िया निवासी गुलेर गांव।
मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया गया
भयूं-गडेरा सड़क का डामरीकरण और सुधारीकरण हुए बगैर मुख्यमंत्री से लोकार्पण कराना घोर अनियमितता है। इस मामले में मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया गया है। शिलापट पर बतौर जिपं अध्यक्ष उनका (हरीश ऐठानी) नाम भी अंकित है। प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। हकीकत सामने आनी चाहिए। -हरीश ऐठानी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, बागेश्वर
कोट
भयूं-गडेरा सड़क पर लोनिवि की गलती से शिलापट लगा दिया गया था। शासन से शिलापटों को स्थल पर लगाने के निर्देश मिलने पर लोनिवि ने शिलापट लगाया। शिलापट भयूं-गुलेर सड़क पर लगाया जाना था। उन्होंने स्वयं इस पर आपत्ति की, तब शिलापट हटाया गया। -बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट
कोट
मामला दिखवाया जाएगा। क्षेत्र के लोग शिकायती पत्र सौंपेंगे तो प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। - विनीत कुमार, जिलाधिकारी, बागेश्वर।
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लोनिवि ने कुछ दिन पहले भयूं-गडेरा सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लोकार्पण से संबंधित शिलापट लगाया था। शिलापट में सड़क का नाम भयूं-गडेरा अंकित था। लागत 1.67 करोड़ लिखी गई थी। इस पर हो हल्ला मचा तो लोनिवि ने शिलापट उखाड़ दिया। विभाग का तर्क है कि शिलापट गलती से लग गया था। गडेरा के लोगों का कहना है कि दो वर्ष पहले जब सड़क का लोकार्पण हुआ तो उसी समय उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठा दी थी लेकिन संबंधित विभाग ने ध्यान नहीं दिया। गांव के लोगों ने सड़क सुधारीकरण के नाम पर धन खपाने की आशंका जताई है। लोगों ने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शिलापट गलत बना था तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। दो वर्ष बाद शिलापट सड़क पर क्यों लगाया और लोगों के विरोध के बाद क्यों हटाया, यह भी जांच में शामिल होना चाहिए।
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लोकार्पण के समय ही किया था विरोध
सात मार्च 2019 को लोनिवि ने जब भयूं-गडेरा सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के कार्य का लोकार्पण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कराया था उसी समय गांव के लोगों ने इसका विरोध जनप्रतिनिधियों और लोनिवि के अधिकारियों के सामने किया था। -रमेश सिंह गढ़िया सामाजिक कार्यकर्ता गुलेर।
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कई सवाल खडे़ कर रही है यह घटना
लोकार्पण के दो वर्ष बाद शिलापट लगाना और जनता के विरोध के बाद उसे हटाना, कई सवाल खड़े कर रही है। गडेरा सड़क के नाम पर घपलेबाजी की बू आ रही है। शिलापट में गुलेर सड़क क्यों लिखा गया। इसकी जांच अवश्य होनी चाहिए। -विनोद सिंह गढ़िया निवासी गडेरा गांव।
कैसे लोकार्पण कर दिया, जांच का विषय
भयूं-गडेरा सड़क की दशा बेहद खराब है। सड़क पर किमी सात के बाद 10 किमी हिस्से में सुधारीकरण और डामरीकरण नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने कैसे लोकार्पण कर दिया, यह जांच का विषय है। - सुरेश सिंह गढ़िया निवासी गुलेर गांव।
मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया गया
भयूं-गडेरा सड़क का डामरीकरण और सुधारीकरण हुए बगैर मुख्यमंत्री से लोकार्पण कराना घोर अनियमितता है। इस मामले में मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया गया है। शिलापट पर बतौर जिपं अध्यक्ष उनका (हरीश ऐठानी) नाम भी अंकित है। प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। हकीकत सामने आनी चाहिए। -हरीश ऐठानी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, बागेश्वर
कोट
भयूं-गडेरा सड़क पर लोनिवि की गलती से शिलापट लगा दिया गया था। शासन से शिलापटों को स्थल पर लगाने के निर्देश मिलने पर लोनिवि ने शिलापट लगाया। शिलापट भयूं-गुलेर सड़क पर लगाया जाना था। उन्होंने स्वयं इस पर आपत्ति की, तब शिलापट हटाया गया। -बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट
कोट
मामला दिखवाया जाएगा। क्षेत्र के लोग शिकायती पत्र सौंपेंगे तो प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। - विनीत कुमार, जिलाधिकारी, बागेश्वर।

विनोद सिंह गढ़िया।- फोटो : BAGESHWAR

सुरेश सिंह गढ़िया।- फोटो : BAGESHWAR

हरीश सिंह ऐठानी।- फोटो : BAGESHWAR