TEMPLE: सुंदरढूंगा के हिम शिखर पर दिखा स्वास्तिक पर्वत, मां आनंदेश्वरी दुर्गा मंदिर की नींव रखते समय पड़ी नजर
बागेश्वर में विश्व विख्यात सुंदरढूंगा घाटी में एक दिव्य स्थल की खोज हुई है। सुंदरढूंगा घाटी स्थित देवी कुंड के सामने हिम शिखर पर ॐ पर्वत की भांति बर्फ से बनी स्वास्तिक की आकृति विद्यमान है।
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बागेश्वर में विश्व विख्यात सुंदरढूंगा घाटी में एक दिव्य स्थल की खोज हुई है। सुंदरढूंगा घाटी स्थित देवी कुंड के सामने हिम शिखर पर ॐ पर्वत की भांति बर्फ से बनी स्वास्तिक की आकृति विद्यमान है। स्वास्तिक पर्वत प्रकाश में आने से जिले को धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में ऊंचाइयां मिलने की प्रबल संभावना पैदा हो गई है।
जिला मुख्यालय से 100 किमी की दूरी पर सुंदरढूंगा क्षेत्र में स्थित देवीकुंड के पास गत शनिवार को बालयोगी स्वामी चैतन्य आकाश जी की प्रेरणा से मां आनंदेश्वरी दुर्गा मंदिर की नींव रखी गई। इसी दौरान स्वामी जी और अन्य लोगों की नजर देवीकुंड के ठीक सामने स्थित हिमशिखर पर पड़ी। लोगों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। शिखर पर सनातन संस्कृति का शुभ चिह्न स्वास्तिक बना हुआ था जो शिखर पर बर्फ पिघलने के कारण स्पष्ट दिखाई दे रहा था। आज तक स्वास्तिक पर्वत की ओर किसी का ध्यान नहीं गया था। पर्वत अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है।
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार स्वास्तिक को मंगल करने वाला और भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। स्वास्तिक की की दोनों रेखाएं भगवान गणेश की पत्नी रिद्धि और सिद्धि को दर्शाती हैं। इसे संपन्नता, समृद्धि और एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक स्वास्तिक यंत्र है और ॐ मंत्र है।
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सुंदरढूंगा घाटी में हिम शिखर पर विद्यमान स्वास्तिक पर्वत का प्रकाश में आना बागेश्वर जिले के लिए धार्मिक पर्यटन की राह खोलने के लिए अहम माना जा रहा है। स्वामी चैतन्य आकाश देवीकुंड क्षेत्र को बेहद रमणीक स्थल बताते हुए कहते हैं कि यह प्रकृति का अनमोल खजाना है।
निर्जन क्षेत्र में है स्वास्तिक पर्वत
सुंदरढूंगा घाटी के हिमशिखर पर स्थित स्वास्तिक पर्वत बेहद निर्जन क्षेत्र है जो अधिकतर बर्फ से ढका रहता है। वाछम निवासी चंदन सिंह दानू, पोथिंग निवासी विनोद सिंह गढ़िया बताते हैं कि गर्मी और बरसात के दौरान वहां सिर्फ अनवाल (चरवाहे) के अलावा कोई नहीं जाता। इलाका जन शून्य होने के कारण स्वास्तिक पर्वत लोगों के नजरों से अब तक दूर रहा।
कैसे पहुंचें देवीकुंड
देवीकुंड जाने के लिए बागेश्वर से 70 किमी दूरी पर स्थित खाती तक वाहन चलते हैं। वहां से तीस किमी का सफर पैदल तय करना पड़ता है। खाती से सात किमी की दूरी पर जांतोली, जांतोली से 11 किमी की दूरी पर कठलिया, कठलिया से पांच किमी की दूरी पर बलूनी टॉप, बलूनी टॉप से सात किमी की दूरी पर देवीकुंड स्थित है।
स्वास्तिक पर्वत का प्रकाश में आना बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस स्थल के विकास में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। स्वास्तिक पर्वत धार्मिक पर्यटन के नए द्वार खोलेगा।
-सुरेश गढ़िया विधायक कपकोट
स्वास्तिक पर्वत को विकसित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। हरसंभव सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
-पीके गौतम जिला पर्यटन अधिकारी बागेश्वर