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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ढूंढी पुलिस ने लापता महिला
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Thu, 13 Oct 2016 11:15 PM IST
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बागेश्वर के एसपी
- फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस महकमे ने लापता महिला को आखिरकार ढूंढ निकाला है। महिला को सीजेएस कोर्ट में पेश करने के बाद नारी निकेतन भेजा गया है। पुलिस इस महिला को 17 अक्तूबर को हाईकोर्ट में पेश करेगी। इस मामले में लंबे समय से सम्मन तामील नहीं करा पाने को लेकर हाईकोर्ट ने डीजीपी को गैर जमानती वारंट का पालन कराने के सख्त निर्देश दिए थे।
2003 में बैजनाथ थाने में आशा देवी पर अपने पति मदन मोहन को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ था। मृतक के भाई दीप चंद्र ने आशा देवी के साथ ही अनिल कुमार बलौदी के खिलाफ भी रिपोर्ट लिखाई थी। इस मामले में 2004 में जिला सत्र न्यायालय बागेश्वर ने दोनों को चार-चार साल की सजा और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जेल से छूटने के बाद आशा देवी और अनिल कुमार बलौदी ने 2014 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। दोनों अपीलार्थियों के खिलाफ हाईकोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। अनिल कुमार ने तो गैर जमानती वारंट रिकॉल करा लिया, लेकिन आशा देवी ने रिकॉल प्रार्थना पत्र नहीं दिया। तब से उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट चल रहे थे।
इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बागेश्वर के एसपी सुखवीर सिंह अदालत में पेश हुए थे। उनके द्वारा आशा देवी के मौजूदा पते पर नहीं होने की बात कही थी। इस पर कोर्ट ने वारंट के अनुपालन में एक सप्ताह का समय दिया था। इस अवधि में वारंट तामील नहीं होने पर कोर्ट ने डीजीपी को गैर जमानती वारंट का पालन कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देशों के बाद एसपी बागेश्वर ने बैजनाथ के एसओ एसपी रायपा और कुंवर सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया था। इस टीम ने महिला को हल्द्वानी के शिवपुरी से बरामद कर लिया। एसपी सुखवीर सिंह ने बताया कि महिला आशा देवी को सीजेएस कोर्ट में पेश करने के बाद नारी निकेतन भेज दिया गया है। 17 अक्तूबर को उसे हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। महिला का पता लगाने वाली पुलिस टीम को एसपी ने ढाई हजार रुपये का इनाम दिया है।
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2003 में बैजनाथ थाने में आशा देवी पर अपने पति मदन मोहन को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ था। मृतक के भाई दीप चंद्र ने आशा देवी के साथ ही अनिल कुमार बलौदी के खिलाफ भी रिपोर्ट लिखाई थी। इस मामले में 2004 में जिला सत्र न्यायालय बागेश्वर ने दोनों को चार-चार साल की सजा और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जेल से छूटने के बाद आशा देवी और अनिल कुमार बलौदी ने 2014 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। दोनों अपीलार्थियों के खिलाफ हाईकोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। अनिल कुमार ने तो गैर जमानती वारंट रिकॉल करा लिया, लेकिन आशा देवी ने रिकॉल प्रार्थना पत्र नहीं दिया। तब से उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट चल रहे थे।
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इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बागेश्वर के एसपी सुखवीर सिंह अदालत में पेश हुए थे। उनके द्वारा आशा देवी के मौजूदा पते पर नहीं होने की बात कही थी। इस पर कोर्ट ने वारंट के अनुपालन में एक सप्ताह का समय दिया था। इस अवधि में वारंट तामील नहीं होने पर कोर्ट ने डीजीपी को गैर जमानती वारंट का पालन कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देशों के बाद एसपी बागेश्वर ने बैजनाथ के एसओ एसपी रायपा और कुंवर सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया था। इस टीम ने महिला को हल्द्वानी के शिवपुरी से बरामद कर लिया। एसपी सुखवीर सिंह ने बताया कि महिला आशा देवी को सीजेएस कोर्ट में पेश करने के बाद नारी निकेतन भेज दिया गया है। 17 अक्तूबर को उसे हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। महिला का पता लगाने वाली पुलिस टीम को एसपी ने ढाई हजार रुपये का इनाम दिया है।
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