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घाटे की भरपाई के लिए हो रही छंटनी
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बागेश्वर। होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायी पिछले वर्ष के लॉकडाउन की मार से उबर नहीं पाए थे कि कोरोना की दूसरी लहर में एक बार फिर उनका काम चौपट हो गया। कार्मिकों पर छंटनी का संकट मंडरा गया है। होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायी घाटे की भरपाई को लेकर चिंतित हैं।
जिले में करीब 70 होटल हैं। इनमें से अकेले 43 होटल कौसानी में हैं। अनलॉक के बाद होटल व्यवसाय थोड़ा उबरने लगा था लेकिन कोविड कर्फ्यू के बाद होटल फिर बंद हो गए। प्रत्येक होटल में 10 से 15 लोगों का स्टाफ है, ऐसे में घाटे की मार झेल रहे होटल व्यवसायियों ने कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। अब एक होटलों की चौकीदारी के लिए केवल एक कार्मिक रखा है। वहीं जिले के तीन सौ से अधिक ढाबे और रेस्टोरेंटों का कारोबार भी प्रभावित हो गया है। व्यवसायियों का कहना है कि होटल, रेस्टोरेंट बंद हैं लेकिन पानी, बिजली के बिल बदस्तूर आ रहे हैं। उन्होंने बिल माफ करने और राहत पैकेज देने की मांग की है।
सारे होटल बंद पड़े हैं। कार्मिकों की छंटनी करनी पड़ी है। होटल बंद होने के बावजूद पानी और बिजली के बिल चुकाने पड़ रहे हैं। सरकार ने पिछले लॉकडाउन में भी होटल व्यवसायियों की कोई मदद नहीं की। इस बार होटल व्यवसायियों को राहत पैकेज दिया जाना चाहिए। - बबलू नेगी अध्यक्ष होटल एसोसिएशन कौसानी
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पिछले साल के लॉकडाउन में काफी नुकसान झेलना पड़ा। रेस्टोरेंट के स्थान पर सब्जी का व्यवसाय करना पड़ा। एक बार फिर रेस्टोरेंट खोला था। काम पटरी पर लौट रहा था। फिर मार पड़ गई है। सरकार को रेस्टोरेंट संचालकों को राहत देनी चाहिए। - संजय जोशी रेस्टोरेंट संचालक बागेश्वर
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जिले में करीब 70 होटल हैं। इनमें से अकेले 43 होटल कौसानी में हैं। अनलॉक के बाद होटल व्यवसाय थोड़ा उबरने लगा था लेकिन कोविड कर्फ्यू के बाद होटल फिर बंद हो गए। प्रत्येक होटल में 10 से 15 लोगों का स्टाफ है, ऐसे में घाटे की मार झेल रहे होटल व्यवसायियों ने कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। अब एक होटलों की चौकीदारी के लिए केवल एक कार्मिक रखा है। वहीं जिले के तीन सौ से अधिक ढाबे और रेस्टोरेंटों का कारोबार भी प्रभावित हो गया है। व्यवसायियों का कहना है कि होटल, रेस्टोरेंट बंद हैं लेकिन पानी, बिजली के बिल बदस्तूर आ रहे हैं। उन्होंने बिल माफ करने और राहत पैकेज देने की मांग की है।
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सारे होटल बंद पड़े हैं। कार्मिकों की छंटनी करनी पड़ी है। होटल बंद होने के बावजूद पानी और बिजली के बिल चुकाने पड़ रहे हैं। सरकार ने पिछले लॉकडाउन में भी होटल व्यवसायियों की कोई मदद नहीं की। इस बार होटल व्यवसायियों को राहत पैकेज दिया जाना चाहिए। - बबलू नेगी अध्यक्ष होटल एसोसिएशन कौसानी
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पिछले साल के लॉकडाउन में काफी नुकसान झेलना पड़ा। रेस्टोरेंट के स्थान पर सब्जी का व्यवसाय करना पड़ा। एक बार फिर रेस्टोरेंट खोला था। काम पटरी पर लौट रहा था। फिर मार पड़ गई है। सरकार को रेस्टोरेंट संचालकों को राहत देनी चाहिए। - संजय जोशी रेस्टोरेंट संचालक बागेश्वर