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धीरे-धीरे निखर रही कुमांऊ की काशी बागेश्वर की सूरत
bageshwar
Updated Thu, 04 May 2017 11:08 PM IST
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सरयू नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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कुमांऊ की काशी कहे जाने वाले बागेश्वर शहर की सूरत धीरे-धीरे निखर रही है। कभी सड़कों से लेकर संगम तक नजर आने वाले गंदगी के ढेर काफी हद तक साफ हो चुके हैं। पवित्र सरयू और गोमती नदियों में भी दशकों बाद लोगों ने सफाई देखी है। विलुप्त सरस्वती मानी जाने वाली भागीरथी से टनों मलबा साफ किया जा चुका है। यदि पालिका प्रशासन द्वारा स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया और शहर के लोगों ने जागरूकता दिखाई तो वह दिन दूर नहीं जब कुमाऊं की काशी पूरी तरह स्वच्छ नजर आएगी।
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भगवान बागनाथ का ऐतिहासिक मंदिर और मोक्षदायिनी सरयू और गोमती नदी का संगम स्थल होने के कारण बागेश्वर शहर का विशेष धार्मिक महत्व है। एक साल पूर्व क कुमांऊ की काशी इतनी गंदी थी कि स्थानीय लोग इसके पानी से आचमन तक करने में परहेज करते थे। पवित्र नदियों में गंदगी के कारण हजारों किमी की दूरी से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती थीं। इसी को देखते हुए अमर उजाला द्वारा नगर में एक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान को जिला प्रशासन का सहयोग मिलने से धार्मिक नगरी में स्वच्छता को लेकर एक मुहिम सी शुरू हुई। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के निर्देश पर पहली बार यहां के स्नान घाटों में गंदगी करने और कपड़े धोने पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू हुई। अभियान का ही असर था कि सरयू नदी में तीन किमी तक विशेष सफाई अभियान चलाया गया।
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दशकों बाद 2017 के उत्तरायणी पर्व पर लोगों ने मोक्षदायिनी सरयू नदी के साफ पानी में स्नान किया। इस समय नगर में विलुप्त सरस्वती मानी जाने वाली भागीरथी की सफाई की जा रही है। पवित्र भागीरथी अभियान के तहत गठित कोर कमेटी के सदस्य नाले में तब्दील हो चुकी भागीरथी की पवित्रता के लिए प्रयासरत हैं। प्रशासन की ओर से भी इसमें सहयोग दिया जा रहा है। अभियान की शुरुआत करने वाले आलोक पांडेय का कहना है कि जब तक भागीरथी अपने पुराने स्वरूप में नहीं लौटती यह अभियान जारी रखा जाएगा। इधर नगर पालिका की ओर से सफाई व्यवस्था के लिए 15 और पर्यावरण मित्र तैनात कर दिए हैं। नगर के अलावा आसपास के गांवों का कूड़ा उठाने के लिए वाहन की व्यवस्था की गई है। इससे सड़कों में बिखरे रहने वाले कूड़े में काफी हद तक कमी आई है।
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