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बेलपत्र के साथ जलाभिषेक से जल्दी प्रसन्न होते हैं शिव 

Sat, 13 Jan 2018 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर। Updated Sat, 13 Jan 2018 11:03 PM IST
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Shiva is pleased with JalpaBhisak with ballet
भगवान बागनाथ के मंदिर का विहंगम दृश्य।  - फोटो : amar ujala

सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के पावन संगम पर स्नान का बड़ा महत्व है। इसमें भी भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर लगने वाले मकर संक्रांति के पर्व पर स्नान करना लाभकारी बताया गया है। मान्यता है कि जो लोग बेलपत्र के साथ भगवान बागनाथ को 108 लोटा जल अर्पित करते हैं, भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। जो लोग त्रिमाघी करते हैं, उन्हें फिर सांसारिक जीवन में ही नहीं भटकना पड़ता है।

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शिव पुराण के अनुसार शिवजी यहां माता पार्वती के साथ विराजे हैं। बाघ का रूप धारण कर मुनिश्रेष्ठ मार्कंडेय ऋषि का तप भंगकर उन्हें दर्शन देने से भोलेनाथ का नाम यहां बागनाथ पड़ा है। शिवजी के इस रूप से सरयू को अयोध्या ले जा रहे मुनिश्रेष्ठ वशिष्ठ का मार्ग प्रशस्त हुआ था। पुराण के अनुसार जो लोग भोलेनाथ को पवित्र मन से 108 लोटा जल अर्पित करते हैं, भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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यही वजह है कि कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों से ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए यहां आते हैं। मंदिर में पूजा कराने वाले पंडित हेम चंद्र जोशी बताते हैं कि भगवान बागनाथ थोड़े में ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं। उन्हें बेलपत्र पत्र बहुत ही प्रिय हैं।
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हाथ में बेलपत्र लेकर जल चढ़ाने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। पंडित जोशी कहते हैं जो लोग यहां तीन दिन रहकर संगम पर स्नान कर त्रिमाघी करके त्रियुगीनारायण भगवान की पूजा करते हैं, शिवजी के ऐसे भक्तों को फिर सांसारिक जीवन में नहीं भटकना पड़ता है। बता दें कि वर्ष 1602 में नागर शैली में निर्मित भव्य मंदिर के लिए रावल परिवार पुजारी नियुक्त हैं। 

कालभैरव नाथ को चढ़ती है खिचड़ी 
बागनाथ मंदिर के पास में ही कालभैरव नाथ का मंदिर है। शिवजी को जलार्पण के बाद कालभैरव को जलार्पण के बाद उनकी पूजा होती है। उन्हें लाल और काला वस्त्र, रोली अक्षत लगाने के बाद उनकी पूजा होती हैं। मंदिर में मिठाई, फल के साथ उड़द और चावल चढ़ाने का प्राविधान है। मंदिर के लिए गोस्वामी परिवार पुजारी नियुक्त हैं।


दीवार पर लिखने से बाणेश्वर करते हैं मनौती पूरी 
बागनाथ मंदिर के उत्तर में बाणेश्वर भगवान का भव्य मंदिर है। श्रद्धालु अपनी मनौती मंदिर की दीवार पर लिखते हैं। मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में खिचड़ी, मिठाई और वस्त्र अर्पित करते हैं। 

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