{"_id":"57e1832e4f1c1be555a821e4","slug":"sanskrit-is-the-mother-of-oracles-and-languages","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कृत देववाणी और भाषाओं की जननी है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कृत देववाणी और भाषाओं की जननी है
ब्यूरो, अमर उजाला बागेश्वर।
Updated Wed, 21 Sep 2016 12:12 AM IST
विज्ञापन
प्रतियोगिता का दीप जलाकर शुभारंभ करते अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार की ओर से यहां आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का बखूबी प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत देववाणी और भाषाओं की जननी है। इसके संरक्षण के लिए सभी को आना होगा।
मुख्य शिक्षा अधिकारी सभागार में आयोजित शुभारंभ समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष ऐठानी ने संस्कृत के सरल, मधुर और वैज्ञानिक भाषा है। संस्कृत के प्रचार, प्रसार, संरक्षण और संवर्द्धन के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का प्रयास सराहनीय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधायक चंदन राम दास ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। आधुनिक खोज और विकास में संस्कृत का भारी योगदान है। संस्कृत को बोलचाल की भाषा में अवश्य लाया जाना चाहिए। मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य ने कहा कि संस्कृत प्रतियोगिता छात्र छात्राओं को संस्कारवान शिक्षा देने में अहम है।
प्रतियोगिता के जिला संयोजक दीप चंद्र जोशी ने इस आयोजन के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि नगर पालिकाध्यक्ष गीता रावल, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक आकाश सारस्वत, सह जिला संयोजक डा. निलेश कुमार आदि ने विचार रखे। पहले दिन संस्कृत नाटक, नृत्य, समूह गान, आशु भाषण आदि प्रतियोगिताएं हुई। इनमें छात्र-छात्राओं ने बूखबी से अपनी प्रतिभा दिखाई। कार्यक्रम का संचालन डा. गोपाल कृष्ण जोशी ने किया। कार्यक्रम में ललित तिवारी, डा. माधवानंद भट्ट, बसंत त्रिपाठी, दिनेश जोशी, नीतू रावत, डा. रमेश कांडपाल, राधेश्याम यादव आदि शामिल थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्य शिक्षा अधिकारी सभागार में आयोजित शुभारंभ समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष ऐठानी ने संस्कृत के सरल, मधुर और वैज्ञानिक भाषा है। संस्कृत के प्रचार, प्रसार, संरक्षण और संवर्द्धन के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का प्रयास सराहनीय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधायक चंदन राम दास ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। आधुनिक खोज और विकास में संस्कृत का भारी योगदान है। संस्कृत को बोलचाल की भाषा में अवश्य लाया जाना चाहिए। मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य ने कहा कि संस्कृत प्रतियोगिता छात्र छात्राओं को संस्कारवान शिक्षा देने में अहम है।
विज्ञापन
प्रतियोगिता के जिला संयोजक दीप चंद्र जोशी ने इस आयोजन के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि नगर पालिकाध्यक्ष गीता रावल, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक आकाश सारस्वत, सह जिला संयोजक डा. निलेश कुमार आदि ने विचार रखे। पहले दिन संस्कृत नाटक, नृत्य, समूह गान, आशु भाषण आदि प्रतियोगिताएं हुई। इनमें छात्र-छात्राओं ने बूखबी से अपनी प्रतिभा दिखाई। कार्यक्रम का संचालन डा. गोपाल कृष्ण जोशी ने किया। कार्यक्रम में ललित तिवारी, डा. माधवानंद भट्ट, बसंत त्रिपाठी, दिनेश जोशी, नीतू रावत, डा. रमेश कांडपाल, राधेश्याम यादव आदि शामिल थे।
विज्ञापन