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छोया गांव के लोगों के लिए सड़क आज भी सपना
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बागेश्वर के छोया गांव से मरीज को डोली पर लाते लोग। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। इस आधुनिक युग में भी अपने पहाड़ के कई गांव यातायात सुविधा के लिए तरस रहे हैं। इन्हीं में से एक का बागेश्वर जिले का छोया गांव। पोथिंग ग्राम पंचायत के हिस्से छोया गांव के लोगों के लिए सड़क आज भी सपना ही है। गांव के सड़क से न जुड़ने से के कारण लोगों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांव के लोगों को मरीज और असहाय लोग डोली में ढोने पड़ते हैं।
छोया तोक निवासी 65 वर्षीय महेंद्र सिंह पुत्र केशर सिंह एक महीना पहले लकवाग्रस्त हो गए थे। मंगलवार को पेशाब बंद होने से उनकी परेशानी बढ़ गई। सड़क न होने से परिजन चिंतित हो उठे कि अब उन्हें अस्पताल कैसे ले जाया जाए। परिजनों ने बुजुर्ग को दिक्कत होने की जानकारी गांव के युवाओं को दी। आनन-फानन में युवा महेंद्र सिंह के घर पहुंच गए। गांव के युवा केदार सिंह, ललित सिंह, लोकपाल सिंह, जगत सिंह, रमेश सिंह, भगवत सिंह, केदार सिंह, दलीप सिंह, चंचल सिंह, गोविंद सिंह ने डोली पर बिठाकर कपकोट अस्पताल ले जाने का फैसला लिया।
यह युवा बुजुर्ग महेंद्र सिंह को डोली में बिठाकर एक किलोमीटर दूर पोथिंग सड़क के लिए निकल पड़े। ऊबड़खाबड़ रास्तों को पार कर युवाओं ने बुजुर्ग को सड़क तक पहुंचाया। वहां से वाहन से बुजुर्ग को कपकोट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
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अक्सर सामने आती है इस तरह की दिक्कत
बागेश्वर। छोया गांव के युवाओं ने बताया कि इस तरह की दिक्कत गांव के लोगों के सामने अक्सर आती रहती है। छोया गांव के सड़क से ना जुड़ा होने की वजह से बीमार, गर्भवती महिलाओं और असहाय लोगों को डोली से सड़क तक लाना पड़ता है। इसमें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधि छोया गांव को यातायात सुविधा प्रदान करने की दिशा में कदम नहीं उठा रहे हैं।
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छोया तोक निवासी 65 वर्षीय महेंद्र सिंह पुत्र केशर सिंह एक महीना पहले लकवाग्रस्त हो गए थे। मंगलवार को पेशाब बंद होने से उनकी परेशानी बढ़ गई। सड़क न होने से परिजन चिंतित हो उठे कि अब उन्हें अस्पताल कैसे ले जाया जाए। परिजनों ने बुजुर्ग को दिक्कत होने की जानकारी गांव के युवाओं को दी। आनन-फानन में युवा महेंद्र सिंह के घर पहुंच गए। गांव के युवा केदार सिंह, ललित सिंह, लोकपाल सिंह, जगत सिंह, रमेश सिंह, भगवत सिंह, केदार सिंह, दलीप सिंह, चंचल सिंह, गोविंद सिंह ने डोली पर बिठाकर कपकोट अस्पताल ले जाने का फैसला लिया।
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यह युवा बुजुर्ग महेंद्र सिंह को डोली में बिठाकर एक किलोमीटर दूर पोथिंग सड़क के लिए निकल पड़े। ऊबड़खाबड़ रास्तों को पार कर युवाओं ने बुजुर्ग को सड़क तक पहुंचाया। वहां से वाहन से बुजुर्ग को कपकोट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
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अक्सर सामने आती है इस तरह की दिक्कत
बागेश्वर। छोया गांव के युवाओं ने बताया कि इस तरह की दिक्कत गांव के लोगों के सामने अक्सर आती रहती है। छोया गांव के सड़क से ना जुड़ा होने की वजह से बीमार, गर्भवती महिलाओं और असहाय लोगों को डोली से सड़क तक लाना पड़ता है। इसमें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधि छोया गांव को यातायात सुविधा प्रदान करने की दिशा में कदम नहीं उठा रहे हैं।