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Bageshwar News: कपकोट के राजेश ने यूपीएससी में हासिल की 988वीं रैंक
Wed, 17 Apr 2024 01:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 17 Apr 2024 01:14 AM IST
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बागेश्वर के धुरकोट गांव में राजेश को यूपीएससी में चयनित होने पर मिठाई खिलाते माता-पिता। संवाद
बागेश्वर। कपकोट के धुरकोट (रिखाड़ी) निवासी एलआईसी के क्लब अभिकर्ता मोहन राम के बेटे राजेश कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 988वीं रैंक हासिल की है। उन्हें तीसरे प्रयास में यह सफलता मिली है। राजेश की प्राथमिक शिक्षा 2003 से 2007 तक सरस्वती शिशु मंदिर बागेश्वर से हुई। वर्ष 2007 से 2014 के बीच उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय सिमार से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्राप्त की। इंटर में उन्होंने पीसीएम विषय के साथ 95 प्रतिशत अंक हासिल कर जिला टॉप किया था। 2014 से 2018 के बीच उन्होंने एनआईटी भोपाल से बीटेक और 2019 से 2021 के बीच मुबई से एमबीए किया। 2021 से 2022 के बीच उन्होंने निजी संस्थान में प्रबंधक की नौकरी की। फरवरी 2022 में नौकरी छोड़कर वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। राजेश ने बागेश्वर में रहकर ही ऑनलाइन यूपीएससी की तैयारी की। राजेश माता शांति देवी गृहिणी हैं। उनकी बड़ी बहन कृष्णा शिक्षिका और छोटी बहन तरुणा सीएचओ हैं।
पूजा के लिए गांव गया था परिवार, मिली खुशखबरी
बागेश्वर। वर्ष 2001 से राजेश का परिवार बागेश्वर में ही रहता है। मंगलवार को जब परिणाम घोषित हुआ तब वह अष्टमी की पूजा के लिए परिवार समेत अपने गांव गए थे। पूजा के दौरान ही परिवार को राजेश के यूपीएससी में चयन की खुशखबरी मिली। राजेश की सफलता से परिवार गदगद है। परिजनों ने मिष्ठान वितरित कर खुशी मनाई। संवाद
Iसफलता का मूल मंत्र
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I-मुकाम पाने के लिए कड़ी मेहनत की। हार से नहीं घबराया
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I-बचपन से ही कामयाबी का शिखर छूने की तमन्ना थी, उसी हिसाब से तैयारी की।
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I-लक्ष्य को पाने के लिए प्राइवेट सेक्टर की नौकरी के दौरान भी मेहनत की।
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पूजा के लिए गांव गया था परिवार, मिली खुशखबरी
बागेश्वर। वर्ष 2001 से राजेश का परिवार बागेश्वर में ही रहता है। मंगलवार को जब परिणाम घोषित हुआ तब वह अष्टमी की पूजा के लिए परिवार समेत अपने गांव गए थे। पूजा के दौरान ही परिवार को राजेश के यूपीएससी में चयन की खुशखबरी मिली। राजेश की सफलता से परिवार गदगद है। परिजनों ने मिष्ठान वितरित कर खुशी मनाई। संवाद
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Iसफलता का मूल मंत्र
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I-मुकाम पाने के लिए कड़ी मेहनत की। हार से नहीं घबराया
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I-बचपन से ही कामयाबी का शिखर छूने की तमन्ना थी, उसी हिसाब से तैयारी की।
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I-लक्ष्य को पाने के लिए प्राइवेट सेक्टर की नौकरी के दौरान भी मेहनत की।
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