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पौधे लगाने का जुनून
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Fri, 25 Mar 2016 11:47 PM IST
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बागेश्वर का नौला
- फोटो : अमर उजाला
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बागेश्वर। जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर चंतोला गांव के प्रयाग राम को पौधे लगाने और उन्हें बच्चों की तरह पालने का जुनून बचपन से रहा है। उनके द्वारा रोपे गए पौधों ने अब वन का रूप ले लिया है। उनकी हाड़तोड़ मेहनत से स्थापित जंगल से गांव के दो नौले चार्ज हो गए हैं। धारे में पानी भी बढ़ गया है। इनसे अब ग्रामीणों की प्यास बुझ रही है। बुढ़ापे के बावजूद पौध रोपना आज भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा में शामिल है।
चंतोला गांव निवासी दल राम के पुत्र प्रयाग राम 85 वसंत देख चुके हैं। उम्र के इस पड़ाव में पहुंचे प्रयाग दा में पर्यावरण को संवारने का गजब का जज्बा है। 15 वर्ष की उम्र उन्होंने आम, आडू, नाशपाती, मेहल, नारंगी, पुलम, अनार, दाड़िम के पेड़ों समेत फूलों के कई किस्म के फूलों में कलम करने का काम सीख लिया था। थोड़े समय में ही उन्हें इस काम में महारथ हासिल हो गई। इस काम से उन्हें थोड़ा बहुत खर्चा मिलने लगा।
पेड़ों में कलम लगाने के लिए उन्हें आसपास के लोगों समेत अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिले के लोग भी बुलाने लगे। 30 साल पहले उन्होंने नर्सरी तैयार करके अपनी आसपास की करीब 20 नाली बंजर भूमि में बांज, तुन, उतीश, क्वैराल, बुरांश, भीमल, मेहल, फल्यांट के अलावा नाशपाती, आडू, आम अखरोट, पुलम, केले के पौधों को रोपना शुरू किया। पौधों को रोपने के बाद उनकी बच्चों की तरह परवरिश की।
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उनके रोपे गए पौधों ने बड़ा होकर अब घने जंगल का रूप धारण कर लिया है। उनके द्वारा स्थापित जंगल, बगीचे में करीब दो हजार चारा, इमारती, फलदार पेड़ पर्यावरण संवर्द्धन कर रहे हैं। वन की स्थापना में उनकी पत्नी कुंती देवी आज भी सहयोग करती हैं। वह पौधों में गोबर, सिंचाई समेत निराई, गुड़ाई करती हैं। उनके तीन बेटों में रणजीत, जगदीश, महिमन दिल्ली के प्राइवेट कंपनियों में काम करते हैं।
बागेश्वर। प्रयाग दा स्थापित वन से जहां हरियाली बढ़ गई है। वहीं दो नौलों में भी पानी चार्ज हो गया है। धारे में पानी की मात्रा भी बढ़ गई है। नौले, धारे से ग्रामीणों, मवेशियों की प्यास बुझ रही है। जिठार नदी के पानी से नरगोली, रावतसेरा के खेतों की सिंचाई हो रही है। एक पनचक्की घराट भी चल रहा है।
बागेश्वर। प्रयाग दा अपनेे बगीचे में उत्पादित आम, केला, नाशपाती, आड़ू, अखरोट, पुलम बेचते नहीं हैं। शिक्षक अनिल रौतेला ने बताया कि प्रयाग राम फल बच्चों में बांटते हैं और उनसे खाली जगह में कोई न कोई पौधा अवश्य रोपकर उसे बड़ा बनाने की प्रेरणा देते हैं। क्षेत्र के लोगों ने शासन प्रशासन से बुजुर्ग पर्यावरणप्रेमी को शीघ्र पुरस्कृत करने की मांग की है।
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चंतोला गांव निवासी दल राम के पुत्र प्रयाग राम 85 वसंत देख चुके हैं। उम्र के इस पड़ाव में पहुंचे प्रयाग दा में पर्यावरण को संवारने का गजब का जज्बा है। 15 वर्ष की उम्र उन्होंने आम, आडू, नाशपाती, मेहल, नारंगी, पुलम, अनार, दाड़िम के पेड़ों समेत फूलों के कई किस्म के फूलों में कलम करने का काम सीख लिया था। थोड़े समय में ही उन्हें इस काम में महारथ हासिल हो गई। इस काम से उन्हें थोड़ा बहुत खर्चा मिलने लगा।
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पेड़ों में कलम लगाने के लिए उन्हें आसपास के लोगों समेत अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिले के लोग भी बुलाने लगे। 30 साल पहले उन्होंने नर्सरी तैयार करके अपनी आसपास की करीब 20 नाली बंजर भूमि में बांज, तुन, उतीश, क्वैराल, बुरांश, भीमल, मेहल, फल्यांट के अलावा नाशपाती, आडू, आम अखरोट, पुलम, केले के पौधों को रोपना शुरू किया। पौधों को रोपने के बाद उनकी बच्चों की तरह परवरिश की।
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उनके रोपे गए पौधों ने बड़ा होकर अब घने जंगल का रूप धारण कर लिया है। उनके द्वारा स्थापित जंगल, बगीचे में करीब दो हजार चारा, इमारती, फलदार पेड़ पर्यावरण संवर्द्धन कर रहे हैं। वन की स्थापना में उनकी पत्नी कुंती देवी आज भी सहयोग करती हैं। वह पौधों में गोबर, सिंचाई समेत निराई, गुड़ाई करती हैं। उनके तीन बेटों में रणजीत, जगदीश, महिमन दिल्ली के प्राइवेट कंपनियों में काम करते हैं।
बागेश्वर। प्रयाग दा स्थापित वन से जहां हरियाली बढ़ गई है। वहीं दो नौलों में भी पानी चार्ज हो गया है। धारे में पानी की मात्रा भी बढ़ गई है। नौले, धारे से ग्रामीणों, मवेशियों की प्यास बुझ रही है। जिठार नदी के पानी से नरगोली, रावतसेरा के खेतों की सिंचाई हो रही है। एक पनचक्की घराट भी चल रहा है।
बागेश्वर। प्रयाग दा अपनेे बगीचे में उत्पादित आम, केला, नाशपाती, आड़ू, अखरोट, पुलम बेचते नहीं हैं। शिक्षक अनिल रौतेला ने बताया कि प्रयाग राम फल बच्चों में बांटते हैं और उनसे खाली जगह में कोई न कोई पौधा अवश्य रोपकर उसे बड़ा बनाने की प्रेरणा देते हैं। क्षेत्र के लोगों ने शासन प्रशासन से बुजुर्ग पर्यावरणप्रेमी को शीघ्र पुरस्कृत करने की मांग की है।