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कमस्यार के गांवों में सुअरों का आतंक
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Mon, 04 Apr 2016 11:25 PM IST
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सुंअरों ने चौपट की फसल
- फोटो : amar ujala
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कमस्यार के कई गांवों में सुअरों ने अपना कब्जा जमा लिया है। सुअरों ने किसानों के खेतों में बोई रबी की फसलों के अलावा शाक भाजी को खोदकर तबाह कर दिया है। छह महीने की कमाई के बर्बाद होने से किसान मायूस हो गए हैं।
उन्होंने वन विभाग से सुअरों से निजात और क्षति का अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने की मांग की है।
कमस्यार क्षेत्र के ठांगा, तुषरेड़ा, औलानी, देवलेत, खाड़ी, सिमायल, खिड़वाकोट, नरगोली, चंतोला, देवलेत, अखराड़ी, गिराणी, ढानड़, पड़ीगाड़, दौलीगाड़, घोड़ागाड़, ट्याकोट आदि गांवों में जंगली सुुअरों ने जबरदस्त आतंक मचा रखा है। सुअरों ने गेहूं, मसूर, सरसों और विभिन्न प्रजाति की सब्जियों को खोदकर बर्बाद कर दिया है।
जगदीश साहनी कहते हैं जंगली सुअरों के झुंड शाम होते ही गांव में धमक जाते हैं। सुअरों ने खेतों में बोई मसूर खोदकर उसे बर्बाद कर दिया है। अब उनके पास अगले साल बोने के लिए बीज तक नहीं बचा है। सुअरों को हांकने पर वह हमलावर हो जा रहे हैं।
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गिरीश राम का कहना है फसलें पहले सूखे से बर्बाद हुई हैं। अब बची फसलें सुअरों ने बर्बाद कर दी हैं। वन विभाग ने किसानों को मुआवजा देना चाहिए। सुअरों को भगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
किसान बहादुर सिंह बोरा का कहना है कृषि किसानों की मुख्य आजीविका का साधन है। सुअरों और बंदरों से फसलें बच जाए तो किसानों के सामने अनाज का संकट नहीं रहेगा। जंगली जानवरों से निजात दिलाने के मामले में अब तक की सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
नरेंद्र भौर्याल का कहना है सुअरों ने अनाज की फसलें और शाक भाजी बर्बाद कर दी हैं। सुअरों के भय से महिलाओं का अकेले में जंगल जाना मुश्किल हो गया है। लेकिन शासन और वन विभाग कुछ करने को तैयार नहीं हैं। खेती के बर्बाद होने के कारण किसानों का खेती के प्रति मोह भंग होते जा रहा है।
उन्होंने वन विभाग से सुअरों से निजात और क्षति का अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने की मांग की है।
कमस्यार क्षेत्र के ठांगा, तुषरेड़ा, औलानी, देवलेत, खाड़ी, सिमायल, खिड़वाकोट, नरगोली, चंतोला, देवलेत, अखराड़ी, गिराणी, ढानड़, पड़ीगाड़, दौलीगाड़, घोड़ागाड़, ट्याकोट आदि गांवों में जंगली सुुअरों ने जबरदस्त आतंक मचा रखा है। सुअरों ने गेहूं, मसूर, सरसों और विभिन्न प्रजाति की सब्जियों को खोदकर बर्बाद कर दिया है।
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जगदीश साहनी कहते हैं जंगली सुअरों के झुंड शाम होते ही गांव में धमक जाते हैं। सुअरों ने खेतों में बोई मसूर खोदकर उसे बर्बाद कर दिया है। अब उनके पास अगले साल बोने के लिए बीज तक नहीं बचा है। सुअरों को हांकने पर वह हमलावर हो जा रहे हैं।
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गिरीश राम का कहना है फसलें पहले सूखे से बर्बाद हुई हैं। अब बची फसलें सुअरों ने बर्बाद कर दी हैं। वन विभाग ने किसानों को मुआवजा देना चाहिए। सुअरों को भगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
किसान बहादुर सिंह बोरा का कहना है कृषि किसानों की मुख्य आजीविका का साधन है। सुअरों और बंदरों से फसलें बच जाए तो किसानों के सामने अनाज का संकट नहीं रहेगा। जंगली जानवरों से निजात दिलाने के मामले में अब तक की सरकारों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
नरेंद्र भौर्याल का कहना है सुअरों ने अनाज की फसलें और शाक भाजी बर्बाद कर दी हैं। सुअरों के भय से महिलाओं का अकेले में जंगल जाना मुश्किल हो गया है। लेकिन शासन और वन विभाग कुछ करने को तैयार नहीं हैं। खेती के बर्बाद होने के कारण किसानों का खेती के प्रति मोह भंग होते जा रहा है।