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Bageshwar News: प्राकृतिक स्रोतों, नदियों से पानी लाना मजबूरी
Wed, 09 Apr 2025 11:32 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 09 Apr 2025 11:32 PM IST
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गरुड़/कपकोट (बागेश्वर)। गरुड़ के स्यालीस्टेट और कपकोट के लीमा में पेयजल संकट गहरा गया है। लोग प्राकृतिक स्रोतों और नदी से पानी ढोने के लिए मजबूर हैं।
गरुड़ के मटेना ग्राम पंचायत के स्यालाटीट तोक में कई दिन से पेयजल संकट बना है। लोग प्राकृतिक स्रोत और नदी से पानी ला रहे हैं। पेयजल जुटाने से लोगों के रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। उमेश जोशी, चंद्रशेखर जोशी, मोहन जोशी, नवीन मिश्रा, जगदीश खोलिया, सुरेश खोलिया आदि ने जल्द पेयजल आपूर्ति सुचारु करने की मांग की है। एसडीएम जितेंद्र वर्मा ने बताया कि विभाग को जल्द पेयजल आपूर्ति सुचारु करने के निर्देश दिए गए हैं।
कपकोट के ऐठाण गांव के लीमा तोक में 15 दिन से पानी का संकट बना हुआ है। 20 परिवार एक स्टैंड पोस्ट के सहारे पानी जुटा रहे हैं। लोगों को प्राकृतिक स्रोतों का भी सहारा लेना पड़ रहा है। सुनीता टम्टा, अनुली देवी, भागुली देवी, चंपा देवी आदि ने जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है।
जेई नीरज हरड़िया ने बताया कि गांव के अधिकतर हिस्से में स्वजल की योजना से पानी की आपूर्ति होती है। एक हिस्से में जल संस्थान का पानी है, वहां नियमित आपूर्ति की जा रही है।
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गरुड़ के मटेना ग्राम पंचायत के स्यालाटीट तोक में कई दिन से पेयजल संकट बना है। लोग प्राकृतिक स्रोत और नदी से पानी ला रहे हैं। पेयजल जुटाने से लोगों के रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। उमेश जोशी, चंद्रशेखर जोशी, मोहन जोशी, नवीन मिश्रा, जगदीश खोलिया, सुरेश खोलिया आदि ने जल्द पेयजल आपूर्ति सुचारु करने की मांग की है। एसडीएम जितेंद्र वर्मा ने बताया कि विभाग को जल्द पेयजल आपूर्ति सुचारु करने के निर्देश दिए गए हैं।
कपकोट के ऐठाण गांव के लीमा तोक में 15 दिन से पानी का संकट बना हुआ है। 20 परिवार एक स्टैंड पोस्ट के सहारे पानी जुटा रहे हैं। लोगों को प्राकृतिक स्रोतों का भी सहारा लेना पड़ रहा है। सुनीता टम्टा, अनुली देवी, भागुली देवी, चंपा देवी आदि ने जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है।
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जेई नीरज हरड़िया ने बताया कि गांव के अधिकतर हिस्से में स्वजल की योजना से पानी की आपूर्ति होती है। एक हिस्से में जल संस्थान का पानी है, वहां नियमित आपूर्ति की जा रही है।
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