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Bageshwar News: वेतन 90000, एनएचएम कर्मियों को मिले महज आठ-आठ हजार
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बागेश्वर। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों को अप्रैल का वेतन 24 दिन देरी से मिला, वह भी पूरा नहीं। सभी कर्मचारियों के हाथ में महज आठ-आठ हजार रुपये आए हैं। इससे वे हैरान-परेशान हैं। जिले में मिशन के तहत 195 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनकी तनख्वाह 17 हजार से 90 हजार रुपये तक निर्धारित है।
जिले में एनएचएम कर्मचारियों के वेतन के लिए हर महीने 50 लाख रुपये के करीब बजट मिलता है। 24 मई को अप्रैल के वेतन के लिए 50 लाख के सापेक्ष महज 15.60 लाख रुपये ही जारी हुए। आठ-आठ हजार रुपये के हिसाब से सभी कर्मचारियों को यह राशि बांट दी गई।
नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नए वित्तीय वर्ष में अब तक एक बार भी वेतन नहीं मिला। अब मिला भी तो महज 8000 रुपये। इतने कम पैसे से उनके सामने घर खर्च चलाने का संकट पैदा हो गया है। बच्चों का नया शिक्षा सत्र भी शुरू हो गया है। उनकी फीस, कॉपी-किताबें, ड्रेस का खर्च भी अप्रैल में बढ़ जाता है। उसी माह वेतन नहीं आने से आर्थिक दिक्कत पैदा हो गई। अब अगर तनख्वाह आई भी है तोबहुत कम।
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जिले के एनएचएम कर्मचारियों को कम वेतन मिलने की जानकारी मिली है। वर्तमान में लेखाकार ऑडिट के कार्यों से देहरादून गए हैं। उनके लौटने के बाद कम वेतन मिलने के कारणों का पता लगाया जाएगा। -कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ बागेश्वर।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा कार्यक्रम में डाटा इंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात ईश्वर जोशी का कहना है कि उनका वेतन 17 हजार वेतन है। उन्हें सिर्फ आठ हजार वेतन मिला है।
एनएचएम से राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम में डाटा इंट्री ऑपरेटर ललित धर्मशक्तू का कहना है कि उनका वेतन 17 हजार है उन्हें भी सिर्फ आठ हजार रुपये वेतन मिला है।
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जिले में एनएचएम कर्मचारियों के वेतन के लिए हर महीने 50 लाख रुपये के करीब बजट मिलता है। 24 मई को अप्रैल के वेतन के लिए 50 लाख के सापेक्ष महज 15.60 लाख रुपये ही जारी हुए। आठ-आठ हजार रुपये के हिसाब से सभी कर्मचारियों को यह राशि बांट दी गई।
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नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नए वित्तीय वर्ष में अब तक एक बार भी वेतन नहीं मिला। अब मिला भी तो महज 8000 रुपये। इतने कम पैसे से उनके सामने घर खर्च चलाने का संकट पैदा हो गया है। बच्चों का नया शिक्षा सत्र भी शुरू हो गया है। उनकी फीस, कॉपी-किताबें, ड्रेस का खर्च भी अप्रैल में बढ़ जाता है। उसी माह वेतन नहीं आने से आर्थिक दिक्कत पैदा हो गई। अब अगर तनख्वाह आई भी है तोबहुत कम।
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जिले के एनएचएम कर्मचारियों को कम वेतन मिलने की जानकारी मिली है। वर्तमान में लेखाकार ऑडिट के कार्यों से देहरादून गए हैं। उनके लौटने के बाद कम वेतन मिलने के कारणों का पता लगाया जाएगा। -कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ बागेश्वर।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा कार्यक्रम में डाटा इंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात ईश्वर जोशी का कहना है कि उनका वेतन 17 हजार वेतन है। उन्हें सिर्फ आठ हजार वेतन मिला है।
एनएचएम से राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम में डाटा इंट्री ऑपरेटर ललित धर्मशक्तू का कहना है कि उनका वेतन 17 हजार है उन्हें भी सिर्फ आठ हजार रुपये वेतन मिला है।