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महिला सशक्तिकरण में नजीर बनी पल्लवी
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Wed, 27 Jun 2018 11:25 PM IST
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माता-पिता के साथ पल्लवी।
- फोटो : अमर उजाला
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महिला सशक्तिकरण में उल्लेखनीय उपलब्धि पर बागेश्वर विकास खंड की ग्राम बड़ेत निवासी पल्लवी उप्रेती को तीलू रौतेली पुरस्कार से नवाजा गया है। ताइक्वांडो में शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में महज 16 साल की छोटी उम्र में उनकी यह उपलब्धि जिले की महिलाओं और छात्राओं के लिए नजीर बनी है।
होनहार के पांव पालने से ही दिखाई देते हैं। पल्लवी पर यह कहावत चरितार्थ होती है। पल्लवी का बचपन से ही खेल की ओर रुझान रहा। पहली कक्षा में प्रवेश के साथ ही उन्होंने ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। कड़ी मेहनत ने उन्हें जिले में इस खेल का सिरमौर भी बनाया। राज्यस्तरीय विद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं में उनके नाम 12 स्वर्ण समेत 13 पदक दर्ज हैं।
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन कर नौ पदक जीत चुकी हैं। अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतना है। इस लक्ष्य के लिए वह प्रशिक्षक कमलेश तिवारी और किरन नेगी के निर्देशन में रोजाना घंटों पसीना बहाती हैं।
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पल्लवी की उपलब्धि
= राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में नौ पदक
(एक स्वर्ण, दो रजत, पांच कांस्य पदक)
= राज्यस्तरीय विद्यालयी प्रतियोगिता में 13 पदक
(12 स्वर्ण, एक रजत पदक)
सेना में मेडिकल अफसर बनना चाहती है पल्लवी
पल्लवी मंडलसेरा के विवेकानंद विद्या मंदिर में कक्षा 12वीं में जीव विज्ञान संकाय की छात्रा है। पल्लवी सेना में बतौर मेडिकल अफसर कॅरियर बनाना चाहती हैं। वह एक चिकित्सक के रूप में देश की सरहदों की रक्षा करने वाली सेना की सेवा करना चाहती है। अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह अभी से मेडिकल की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी है।
साधारण परिवार का बढ़ाया मान
इस उपलब्धि से पल्लवी ने साधारण पृष्ठभूमि वाले अपने परिवार का मान बढ़ाया है। पल्लवी के पिता मोहन उप्रेती सैंज में जनरल स्टोर चलाते हैं। जबकि मां चंद्रकला गृहिणी है। छोटा भाई सुधांशू नवीं का छात्र है। पल्लवी को तीलू रौतेली पुरस्कार मिलने के बाद घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों ने भी उन्हें बधाई दी।
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होनहार के पांव पालने से ही दिखाई देते हैं। पल्लवी पर यह कहावत चरितार्थ होती है। पल्लवी का बचपन से ही खेल की ओर रुझान रहा। पहली कक्षा में प्रवेश के साथ ही उन्होंने ताइक्वांडो का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। कड़ी मेहनत ने उन्हें जिले में इस खेल का सिरमौर भी बनाया। राज्यस्तरीय विद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं में उनके नाम 12 स्वर्ण समेत 13 पदक दर्ज हैं।
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राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन कर नौ पदक जीत चुकी हैं। अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतना है। इस लक्ष्य के लिए वह प्रशिक्षक कमलेश तिवारी और किरन नेगी के निर्देशन में रोजाना घंटों पसीना बहाती हैं।
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पल्लवी की उपलब्धि
= राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में नौ पदक
(एक स्वर्ण, दो रजत, पांच कांस्य पदक)
= राज्यस्तरीय विद्यालयी प्रतियोगिता में 13 पदक
(12 स्वर्ण, एक रजत पदक)
सेना में मेडिकल अफसर बनना चाहती है पल्लवी
पल्लवी मंडलसेरा के विवेकानंद विद्या मंदिर में कक्षा 12वीं में जीव विज्ञान संकाय की छात्रा है। पल्लवी सेना में बतौर मेडिकल अफसर कॅरियर बनाना चाहती हैं। वह एक चिकित्सक के रूप में देश की सरहदों की रक्षा करने वाली सेना की सेवा करना चाहती है। अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह अभी से मेडिकल की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी है।
साधारण परिवार का बढ़ाया मान
इस उपलब्धि से पल्लवी ने साधारण पृष्ठभूमि वाले अपने परिवार का मान बढ़ाया है। पल्लवी के पिता मोहन उप्रेती सैंज में जनरल स्टोर चलाते हैं। जबकि मां चंद्रकला गृहिणी है। छोटा भाई सुधांशू नवीं का छात्र है। पल्लवी को तीलू रौतेली पुरस्कार मिलने के बाद घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों ने भी उन्हें बधाई दी।