फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Officer submitted report

तहसीलदार को सौंपी रिपोर्ट

Thu, 28 Jan 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, कपकोट (बागेश्वर)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, कपकोट (बागेश्वर)। Updated Thu, 28 Jan 2016 01:01 AM IST
विज्ञापन

 तहसीलदार मदन सिंह बिरोड़िया के निर्देश पर लीती रिठकुला पेयजल योजना के स्नो सैंड फिल्टर में मरे बंदरों के मामले की जांच के लिए गए नायब तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंप दी है।

विज्ञापन


 जांच में फिल्टर में 22 बंदरों के मरने की पुष्टि हुई है। तहसीलदार ने पेयजल संस्थान को फिल्टर की तुरंत बेरिकेडिंग करने और समय-समय पर सफाई करके उसमें दवाइयां डालने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन


 पिछले दिनों पेयजल संस्थान की लीती रिठकुला पेयजल योजना के स्नो सैंड फिल्टर में 22 बंदर मर गए थे। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला था। होहल्ला होने के बाद जेई ने वहां बंदरों के शव नहीं दिखाई देने की बात कही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


 शामा के लोगों ने इस मामले में पेयजल संस्थान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। तहसीलदार बिरोड़िया ने नायब तहसीलदार पूरन सिंह बिष्ट और राजस्व उप निरीक्षक मान सिंह टाकुली को मौके पर जाकर मामले की जांच के निर्देश दिए थे।

 तहसीलदार ने बताया कि जांच रिपोर्ट में बंदरों के मरने की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि फिल्टर निर्जन वन क्षेत्र में है। वह चारों ओर से खुला है। उसकी बेरिकेडिंग भी नहीं की गई है। संभवत: बंदर का एक बच्चा फिल्टर में गिरा होगा। उसे बचाने के लिए अन्य बंदर उसमें कूद गए।

पानी के अत्यधिक ठंड होने के कारण बंदरों की मौत हो गई होगी। वनकर्मियों के सहयोग से ग्रामीणों ने बंदरों को दूर फेंक दिया था। तहसीलदार ने बताया कि पेयजल संस्थान ने फिल्टर की सफाई करके उसमें दवाई डलवा दी है। योजना में पानी सुचारु रूप से चल रहा है।

उन्होंने बताया कि पेयजल संस्थान को फिल्टर की बेरिकेडिंग कराकर उसकी तय समय पर सफाई करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उधर पूर्व बीडीसी सदस्य और कांग्रेेस कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि यह पूरा प्रकरण पेयजल संस्थान की लापरवाही से हुआ है।

विभाग ने फिल्टर की वर्षों से बेरिकेडिंग नहीं कराई है। फिल्टर के अलावा योजना में बनी अन्य टंकियों की भी नियमित सफाई नहीं की जाती है। विभाग सफाई के नाम पर कागजों में अब तक लाखों रुपया पानी की तरह बहा चुका है।


 उन्होंने कहा कि योजना की अन्य टंकियों की बारीकी से जांच की जाए तो उनमें भारी मात्रा में गंदगी के अलावा जानलेवा कीड़े मिलेंगे। दूषित पानी पीने के कारण कई लोग पेट के रोगों से परेशान हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed