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Bageshwar News: जैसर और सीमार में रेबीज नहीं, सर्रा बीमारी के मिले संकेत
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गरुड़ (बागेश्वर)। तहसील क्षेत्र के जैसर और सीमार गांव में पशुओं की मौत के बाद दहशत का माहौल अब कम होने लगा है। पशुपालन विभाग की जांच में सामने आया है कि क्षेत्र में किसी भी जानवर में रेबीज के लक्षण नहीं हैं। सीमार गांव में दो अन्य भैंसों में सर्रा बीमारी के संकेत मिले हैं जो रेबीज से मिलती-जुलती जरूर है लेकिन उससे अलग बीमारी है। विभाग ने पशुओं के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं और जानवरों का टीकाकरण शुरू कर दिया है।
बीते दिनों तीन भैंसों की मौत और एहतियातन 20 ग्रामीणों को रेबीज वैक्सीन लगने के बाद से गांव में एक सप्ताह से डर का माहौल था। इसके बाद वेटरिनरी विभाग की टीम ने लगातार दो दिनों तक गांव में कैंप कर स्थिति का जायजा लिया और मवेशियों को टीके लगाए।
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ग्रामीण सुनील पांडेय और केशर सिंह ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने पशुओं का उपचार व टीकाकरण किया है। विभाग की ओर से दो दिन बाद दोबारा निरीक्षण का आश्वासन मिला है जिससे अब गांव में हालात सामान्य हो रहे हैं।
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कोट
जैसर गांव में अब किसी भी जानवर में रेबीज जैसे लक्षण नहीं हैं। सीमार गांव में दो अन्य भैंसों में सर्रा बीमारी के संकेत मिले हैं जो रेबीज जैसे लक्षणों वाली ही एक अलग बीमारी है। पशुओं के सैंपल ले लिए हैं और टीका भी लगा दिया गया है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद उपचार किया जाएगा। विभाग की टीम लगातार गांव में मुस्तैद रहेगी। - डॉ. शिव कुमार, पशु चिकित्सक, गरुड़
क्या है सर्रा रोग
वर्षा ऋतु और नमी के मौसम में पशुओं में सर्रा नामक घातक बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जिले के उप मुख्या पशुचिकित्साधिकारी डॉ. पंकज जोशी ने बताया कि यह बीमारी ट्रिपैनोसोमा नामक परजीवी से होती है, जो मुख्य रूप से डांस मक्खी और चिचड़ियों के काटने से पशुओं के खून में फैलती है। गरुड़ क्षेत्र में अधिक बीमार भैंस का नमूना जांच के लिए भेज दिया है।
मुख्य लक्षण-
पशु को तेज बुखार आना और शरीर में कंपकंपी होना।
पशु का सुस्त होना, दाना-चारा छोड़ना और अचानक वजन घटना।
गंभीर स्थिति में पशु का गोल-गोल घूमना और चक्कर खाकर गिर जाना।
बचाव व उपाय-
पशुबाड़े के आसपास जलभराव न होने दें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
मक्खी-मच्छर और चिचड़ियों को भगाने के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव करें।
लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराएं।
सर्रा बिमारी के दौरान दुधारु पशुओं का दूध पिया जा सकता है।