{"_id":"574884d24f1c1b3207691304","slug":"mushrooms-planted-income-increase","type":"story","status":"publish","title_hn":"मशरूम लगाएं, आय बढ़ाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मशरूम लगाएं, आय बढ़ाएं
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Fri, 27 May 2016 11:03 PM IST
विज्ञापन
मशरूम फार्मर
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केंद्र में ढिंगरी मशरूम उत्पादन विषय पर ग्रामीण युवाओं के लिए आयोजित तीन दिनी प्रयोगात्मक कृषक प्रशिक्षण शिविर का समापन हो गया है। केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने ढिंगरी मशरूम के उत्पादन के लिए भूसा तैयार करने की विधि से लेकर फसल का रखरखाव, बीमारी तथा कीटों से बचाव मशरूम की तुड़ाई तथा भंडारण के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती से आमदनी दोगुनी होती है।
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ जोशी ने कहा कि गर्मियों में 18 से 26 डिग्री तापमान में बंद कमरे में इसे आसानी से उगाया जा सकता हैं जिससे जंगली जानवरों से कोई नुकसान नहीं होता है। मशरूम प्रोटीन का एक बहुत अच्छा स्रोत है इसमें 37.19 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है। प्रोटीन के अलावा इसमें मिनरल्स और विटामिंस भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इसका सेवन अनेक बीमारियों में जैसे हृदय रोग, सूखा रोग एवं मधुमेह आदि में लाभकारी है।
ढिंगरी मशरूम को गेहूं के भूसे, धान के पुआल, मक्का के तने, सोयाबीन एवं दलहनी फसलों के भूसे पर आसानी से उगाया जा सकता है इसको उगाने के लिए किसी भी प्रकार के कंपोस्ट की आवश्यकता नहीं होती। इसका उत्पादन आर्थिक दृष्टि से सस्ता है।
विज्ञापन
इसकी फसल बीजाई करने के 20 से 25 दिन बाद तैयार होने लगती है। प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को दस किलो मशरूम का बीज (स्पान) वितरित किया गया। कार्यक्रम में सहायक निधि सिंह ने मशरूम का अचार व सुखाने की विधि के बारे में बताया, प्रक्षेत्र प्रबंधक मेदनी प्रताप सिंह ने कृषकों को प्रक्षेत्र में लगी प्याज की फसल के बीजोत्पादन तकनीकी के विषय में बताया। वहां प्रगतिशील काश्तकार शहयात सिंह, शेर सिंह, ग्राम प्रधान छौना मोहन सिंह, स्वयंसेवी संस्था कपकोट के प्रहलाद सिंह कोश्यारी समेत कुल 22काश्तकार मौजूद थे।
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ जोशी ने कहा कि गर्मियों में 18 से 26 डिग्री तापमान में बंद कमरे में इसे आसानी से उगाया जा सकता हैं जिससे जंगली जानवरों से कोई नुकसान नहीं होता है। मशरूम प्रोटीन का एक बहुत अच्छा स्रोत है इसमें 37.19 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है। प्रोटीन के अलावा इसमें मिनरल्स और विटामिंस भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इसका सेवन अनेक बीमारियों में जैसे हृदय रोग, सूखा रोग एवं मधुमेह आदि में लाभकारी है।
विज्ञापन
ढिंगरी मशरूम को गेहूं के भूसे, धान के पुआल, मक्का के तने, सोयाबीन एवं दलहनी फसलों के भूसे पर आसानी से उगाया जा सकता है इसको उगाने के लिए किसी भी प्रकार के कंपोस्ट की आवश्यकता नहीं होती। इसका उत्पादन आर्थिक दृष्टि से सस्ता है।
विज्ञापन
इसकी फसल बीजाई करने के 20 से 25 दिन बाद तैयार होने लगती है। प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को दस किलो मशरूम का बीज (स्पान) वितरित किया गया। कार्यक्रम में सहायक निधि सिंह ने मशरूम का अचार व सुखाने की विधि के बारे में बताया, प्रक्षेत्र प्रबंधक मेदनी प्रताप सिंह ने कृषकों को प्रक्षेत्र में लगी प्याज की फसल के बीजोत्पादन तकनीकी के विषय में बताया। वहां प्रगतिशील काश्तकार शहयात सिंह, शेर सिंह, ग्राम प्रधान छौना मोहन सिंह, स्वयंसेवी संस्था कपकोट के प्रहलाद सिंह कोश्यारी समेत कुल 22काश्तकार मौजूद थे।