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स्कूलों के लिए नजीर पेश कर रहा राजूहा भगरतोला
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बागेश्वर का जूनियर हाईस्कूल भगरतोला। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जहां सरकारी विद्यालयों की छात्र संख्या में लगातार गिरावट हो रही है, वहीं जूनियर हाईस्कूल भगरतोला में वर्ष 2006 के बाद से लगातार 100 से अधिक की छात्र संख्या रही है। यह विद्यालय जिले के जूनियर हाईस्कूलों में सर्वाधिक छात्र संख्या वाला विद्यालय है। विद्यालय को इस मुकाम तक पहुंचाने में सभी शिक्षकों की अहम भूमिका रही है। इसी कारण वहां के प्रधानाध्यापक महेश पंत को उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया है।
राजूहा भगरतोला की स्थापना वर्ष 2001 में अशासकीय विद्यालय के रूप में हुई थी। शिक्षक महेश वहां सत्र 2003-04 में सहायक अध्यापक बने। तब विद्यालय की छात्र संख्या 41 थी। वर्ष 2005 में प्रधानाध्यापक का प्रभार मिलने के बाद उन्होंने विद्यालय की छात्र संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। लगातार अभिभावकों से संपर्क कर विद्यालय में दी जाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जानकारी दी। इससे प्रेरित होकर लोगों ने अपने पाल्यों को निजी विद्यालयों की बजाय यहां भेजना शुरू कर दिया।
परिणाम अनुकूल रहा और वर्ष 2006 में विद्यालय की छात्र संख्या 121 और सत्र 2010-11 के सत्र में विद्यालय की छात्र संख्या 198 तक पहुंची। इस बीच विद्यालय को निजी विद्यालयों से भी कड़ी प्रतिस्पर्द्धा करनी पड़ी। इस कारण बाद के वर्षों में विद्यालय की छात्र संख्या में कुछ गिरावट हुई, लेकिन छात्र संख्या अन्य जूनियर हाईस्कूलों से अब भी बेहतर है। वर्ष 2014 में प्रांतीयकरण के बाद पंत को विद्यालय का प्रधानाध्यापक नियुक्त किया गया है। विद्यालय में शिक्षकों के सभी पद भरे हैं। इसका लाभ भी विद्यालय परिवार को मिल रहा है।
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नवाचारी कार्यक्रमों से शिक्षा के सरलीकरण में मिली मदद
बागेश्वर। प्रधानाध्यापक महेश पंत का कहना है कि शिक्षा के सरलीकरण के लिए विद्यालय में कई नवाचारी कार्यक्रम कराए गए। खेल-खेल में सीखें कार्यक्रम से जहां शिक्षा का सरलीकरण हुआ, वहीं बच्चों को सीखने में आसानी हुई। विद्यालय में खेलकूद और व्यवहारिक गतिविधियों का भी संचालन किया जाता है। समय-समय पर अभिभावकों के साथ बैठक कर उनके पाल्यों की शैक्षणिक प्रगति बताई जाती है। उसे बेहतर करने के लिए सामूहिक प्रयास किया जाता है। विद्यालयों में तैनात चारों शिक्षक पूरे लगन और मेहनत से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
राजूूहा भगरतोला में छात्र संख्या का सर्वाधिक होना दिखाता है कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों के सभी पद भरे हैं, वहां लोग अपने बच्चों को भेज रहे हैं। कई जूनियर हाईस्कूलों में एक या दो शिक्षक तैनात हैं। ऐसे में अभिभावकों को मजबूरी में बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजना पड़ता है। शासन-प्रशासन को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
- रमेश सिंह रावत, जिलाध्यक्ष, राजूहा शिक्षक संघ, बागेश्वर।
भगरतोला में छात्र संख्या सर्वाधिक होने का श्रेय विद्यालय में तैनात शिक्षकों को जाता है। शिक्षकों की कड़ी मेहनत और प्रधानाध्यापक के कुशल मार्गदर्शन से विद्यालय की छात्र संख्या हर वर्ष बेहतर रही है। उनका यह प्रयास अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रेरित करेगा।
- पद्मेंद्र सकलानी, डीईओ बेसिक, बागेश्वर।
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राजूहा भगरतोला की स्थापना वर्ष 2001 में अशासकीय विद्यालय के रूप में हुई थी। शिक्षक महेश वहां सत्र 2003-04 में सहायक अध्यापक बने। तब विद्यालय की छात्र संख्या 41 थी। वर्ष 2005 में प्रधानाध्यापक का प्रभार मिलने के बाद उन्होंने विद्यालय की छात्र संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। लगातार अभिभावकों से संपर्क कर विद्यालय में दी जाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जानकारी दी। इससे प्रेरित होकर लोगों ने अपने पाल्यों को निजी विद्यालयों की बजाय यहां भेजना शुरू कर दिया।
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परिणाम अनुकूल रहा और वर्ष 2006 में विद्यालय की छात्र संख्या 121 और सत्र 2010-11 के सत्र में विद्यालय की छात्र संख्या 198 तक पहुंची। इस बीच विद्यालय को निजी विद्यालयों से भी कड़ी प्रतिस्पर्द्धा करनी पड़ी। इस कारण बाद के वर्षों में विद्यालय की छात्र संख्या में कुछ गिरावट हुई, लेकिन छात्र संख्या अन्य जूनियर हाईस्कूलों से अब भी बेहतर है। वर्ष 2014 में प्रांतीयकरण के बाद पंत को विद्यालय का प्रधानाध्यापक नियुक्त किया गया है। विद्यालय में शिक्षकों के सभी पद भरे हैं। इसका लाभ भी विद्यालय परिवार को मिल रहा है।
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नवाचारी कार्यक्रमों से शिक्षा के सरलीकरण में मिली मदद
बागेश्वर। प्रधानाध्यापक महेश पंत का कहना है कि शिक्षा के सरलीकरण के लिए विद्यालय में कई नवाचारी कार्यक्रम कराए गए। खेल-खेल में सीखें कार्यक्रम से जहां शिक्षा का सरलीकरण हुआ, वहीं बच्चों को सीखने में आसानी हुई। विद्यालय में खेलकूद और व्यवहारिक गतिविधियों का भी संचालन किया जाता है। समय-समय पर अभिभावकों के साथ बैठक कर उनके पाल्यों की शैक्षणिक प्रगति बताई जाती है। उसे बेहतर करने के लिए सामूहिक प्रयास किया जाता है। विद्यालयों में तैनात चारों शिक्षक पूरे लगन और मेहनत से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
राजूूहा भगरतोला में छात्र संख्या का सर्वाधिक होना दिखाता है कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों के सभी पद भरे हैं, वहां लोग अपने बच्चों को भेज रहे हैं। कई जूनियर हाईस्कूलों में एक या दो शिक्षक तैनात हैं। ऐसे में अभिभावकों को मजबूरी में बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजना पड़ता है। शासन-प्रशासन को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
- रमेश सिंह रावत, जिलाध्यक्ष, राजूहा शिक्षक संघ, बागेश्वर।
भगरतोला में छात्र संख्या सर्वाधिक होने का श्रेय विद्यालय में तैनात शिक्षकों को जाता है। शिक्षकों की कड़ी मेहनत और प्रधानाध्यापक के कुशल मार्गदर्शन से विद्यालय की छात्र संख्या हर वर्ष बेहतर रही है। उनका यह प्रयास अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रेरित करेगा।
- पद्मेंद्र सकलानी, डीईओ बेसिक, बागेश्वर।