फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   migration from leti village

जाने क्यों लेटी गांव के घर हो रहे खाली

Mon, 11 Feb 2019 10:55 PM IST
दीपक नेगी गणेश उपाध्याय /अमर उजाला/बागेश्वर
गणेश उपाध्याय /अमर उजाला/बागेश्वर Published by: दीपक नेगी Updated Mon, 11 Feb 2019 10:55 PM IST
विज्ञापन
migration from leti village
लेटी गांव। - फोटो : अमर उजाला

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बागेश्वर ब्लॉक के लेटी गांव से पलायन बढ़ रहा है। पलायन की मार से इस गांव में अब तक 15 घरों में ताला लग चुका है। इंटर कॉलेज न होने से इस गांव के बच्चों को इंटर की पढ़ाई के लिए क्वैराली या बागेश्वर आना पड़ता है, जबकि यहां से क्वैराली दस और बागेश्वर 12 किलोमीटर दूर है।  एएनएम सेंटर इस  गांव से करीब छह किमी दूर है। जिसके चलते महिलाओं को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती है। चार साल पहले बनी गांव की सड़क में डामरीकरण नहीं हो पाया है। 

विज्ञापन


 जिला मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर इस गांव में सब्जी अच्छा उत्पादन होता है। पहले इस गांव में 130 परिवार रहते थे। इनमें से 15 परिवार बागेश्वर, हल्द्वानी व दिल्ली पलायन कर चुके हैं। वर्तमान में यहां 115 परिवार ही रह रहे हैं। क्षेत्रवासी बताते हैं कि गांव निवासी सीआरपीएफ के जवान शिव सिंह, बंगाल इंजीनियर के हवलदार पूरन सिंह, आर्मी सप्लाई कोर में तैनात भूपाल सिंह की सेवाकाल में ही मौत हुई थी। ग्रामीण यहां के राउमावि का उच्चीकरण करने, सड़क का नाम सेवाकाल में दिवंगत हुए उक्त जवानों के नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं। लेकिन शासन द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव की समस्याओं का समाधान न होने से लोगों में काफी आक्रोश बना हुआ है। 
विज्ञापन


प्रसव पीड़िताओं को काफी परेशानी होती है
 ग्राम प्रधान दीपा देवी कहती हैं कि गांव में एएनएम सेंटर न होने से प्रसव पीड़िताओं को छह किमी दूर धारी ले जाना पड़ता है। इसमें उन्हें काफी दिक्कतें होती हैं। पंचायत घर का जीर्णोद्धार नहीं हो पा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
सिंचाई के लिए नहीं है नहर 
सरपंच और पूर्व प्रधान गोविंद सिंह कहते हैं कि गांव के लोग सब्जियां बेचने के लिए बागेश्वर ले जाते हैं। सब्जी उत्पादन की काफी संभावनाओं के बाद भी गांव में सिंचाई के लिए नहर नहीं है। 

 
बदहाल है सड़क 
गोविंदी देवी कहती हैं गांव के लिए सड़क तो काट दी। डामरीकरण न होने से उसमें गड्ढे ही गड्ढे हैं। बदहाल सड़क दुर्घटना को दावत दे रही है। 
  
उच्चीकरण की मांग पर सब चुप हैं 
गोविंद सिंह कहते हैं राउमावि के उच्चीकरण की मांग पर सब चुप हैं। बच्चों को इंटर की पढ़ाई के लिए बागेश्वर या  क्वैराली जाना पड़ता है। बच्चे अकेले स्कूल जाने में डरते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed