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श्रावण के पहले सोमवार को भक्तों से गुलजार रहा बाबा बागनाथ का दरबार
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बागेश्वर के बागनाथ मंदिर में जलाभिषेक करते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। श्रावण के पहले सोमवार को बागनाथ मंदिर भक्तों से गुलजार रहा। भक्तों ने सरयू नदी के जल से भगवान शिव का अभिषेक किया। विधिविधान से पूजा अर्चना कर भगवान शिव से सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। भक्तों ने महामारी को देखते हुए कोरोना गाइडलाइन के बीच मंदिर में दर्शन किए।
भक्तों की भीड़ को देखकर मंदिर परिसर में पूजा अर्चना करवाने वाले पंडित-पुरोहितों के चेहरे भी खिले रहे। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने कहा कि मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस प्रशासन का सहयोग मांगा गया था। मंदिर में तैनात सुरक्षा कर्मियों का अच्छा सहयोग मिला। उन्होंने मंदिर आ रहे भक्तों से कोविड गाइडलाइन का विशेष ध्यान देने और कड़ाई से पालन करने की भी अपील की। इधर, श्रावण के पहले सोमवर को जिले के कपकोट के शिवालय, गरुड़ के बैजनाथ धाम सहित कांडा, दुगनाकुरी और काफलीगैर तहसील के देवालयों में पूरे दिन पूजा अर्चना होती रही।
पिछले श्रावण बंद थे बाबा के कपाट
बागेश्वर। पिछले वर्ष कोरोना महामारी के चलते श्रावण के पूरे महीने बाबा बागनाथ के कपाट बंद रहे। हालांकि इस दौरान लॉकडाउन में ढील मिल गई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों को देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने भक्तों के लिए मंदिर के कपाट नहीं खोले थे। तब भक्तों ने मंदिर के बाहर से ही पूजा अर्चना की थी।
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भक्तों की भीड़ को देखकर मंदिर परिसर में पूजा अर्चना करवाने वाले पंडित-पुरोहितों के चेहरे भी खिले रहे। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने कहा कि मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस प्रशासन का सहयोग मांगा गया था। मंदिर में तैनात सुरक्षा कर्मियों का अच्छा सहयोग मिला। उन्होंने मंदिर आ रहे भक्तों से कोविड गाइडलाइन का विशेष ध्यान देने और कड़ाई से पालन करने की भी अपील की। इधर, श्रावण के पहले सोमवर को जिले के कपकोट के शिवालय, गरुड़ के बैजनाथ धाम सहित कांडा, दुगनाकुरी और काफलीगैर तहसील के देवालयों में पूरे दिन पूजा अर्चना होती रही।
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पिछले श्रावण बंद थे बाबा के कपाट
बागेश्वर। पिछले वर्ष कोरोना महामारी के चलते श्रावण के पूरे महीने बाबा बागनाथ के कपाट बंद रहे। हालांकि इस दौरान लॉकडाउन में ढील मिल गई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों को देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने भक्तों के लिए मंदिर के कपाट नहीं खोले थे। तब भक्तों ने मंदिर के बाहर से ही पूजा अर्चना की थी।
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